भूगोल / Geography

प्रदूषण का अर्थ एवं परिभाषा । पर्यावरणीय प्रदूषक एवं उसके मुख्य प्रभाव

प्रदूषण का अर्थ एवं परिभाषा । पर्यावरणीय प्रदूषक एवं उसके मुख्य प्रभाव

प्रदूषण का अर्थ एवं परिभाषा

  1. संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मानव-पर्यावरण सम्मेलन में पर्यावरणीय प्रदूषण को इस प्रकार परिभाषित किया गया-“प्रदूषक (Pollutants) वे पदार्थ है जो अनुचित स्थान पर, अनुचित समय पर, अनुचित मात्रा में मानव द्वारा विसर्जित किये जाते हैं। इनसे प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से मानव के स्वास्थ्य और उसके संसाधनों को हानि होती है। प्रदूंषण मानव की वांछित गतिविधियों का अवांछित प्रभाव है।”

2 लार्ड केनेट के अनुसार, “पर्यावरण में उन तत्वों या ऊर्जा की उपस्थिति को प्रदूषण कहते हैं, जो मनुष्य द्वारा बिना चाहे उत्पादित किये गये हों जिनके उत्पादन का उद्देश्य अब समाप्त हो गया हो, जो अचानक बच निकले हों या जिनका मनुष्य के स्वास्थ्य पर अकथनीय हानिकारक प्रभाव पड़ता हो।”

  1. दासमान (Desman) के मतानुसार, “उस दशा या स्थिति को प्रदूषण कहते हैं, जब मानव द्वारा पर्यावरण में विभिन्न तत्वों एवं ऊर्जा का इतनी अधिक मात्रा में संचय हो जाता हे कि वे पारितन्त्र द्वारा आत्मसात करने की क्षमता से अधिक हो जाते हैं।
  2. ओडम (Odum) के अनुसार, “प्रदूषण हवा, जल एवं मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविकीय गुणों में एक ऐसा अवांछनीय परिवर्तन है, जिससे कि मानव जीवन, औद्योगिक प्रक्रियाएँ, जीवन दशायें तथा सांस्कृतिक तत्वों की हानि होती है अथवा हमारे कच्चे माल की गुणवत्ता घटती है।
  3. डी. एम. डेकन (1972) के मतानुसार, “प्रदूषण के अन्तर्गत मनुष्य एवं उसके पालतू मवेशियों के उन समस्त इच्छित एवं अनिच्छित कार्यों तथा उनसे उत्पन्न प्रभावों एवं परिणामों को सम्मिलित किया जाता है, जो मनुष्य को अपने पर्यावरण से आनन्द एवं पूर्ण लाभ प्राप्त करने की उसकी क्षमता को कम करते हैं।”
  4. “वस्तुओं के उत्पादन एवं उपभोग के प्रत्येक चरण में अवशिष्ट पदार्थों का जनन होता है। ये अपशिष्ट पदार्थ उस समय प्रदूषक या पर्यावरणीय समस्या होते हैं जबकि उनका वायुमण्डलीय, महासागरीय या पार्थिव पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।”- Massachusetts Institute of Technology (MIT)
  5. “मनुष्यों के क्रिया-कलापों से उत्पन्न अपशिष्ट उत्पादों के रूप में पदार्थों एवं ऊर्जा के विमोचन से प्राकृतिक पर्यावरण में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को प्रदूषण कहते हैं।”- National Environmental Research Institutes (NERC)

प्रदूषक (Pollutants)-

वे कारक जो प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं, प्रदूषक कहलाते है। वास्तव में प्रदूषक विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमारे द्वारा बनाये गये, प्रयोग में लाये गये और फेंके गए अनेक पदार्थों के वे अवशेष हैं जो वातावरण को किसी न किसी रूप में प्रदूषित करते हैं। प्रदूषकों को उनकी प्रवृत्ति के आधार पर निम्न दो भागों में बाँटा गया है-

  1. निम्नकरणीय प्रदूषक (Biodegradable Pollutants)- वे प्रदूषक जिन्हें सूक्ष्म जीवों द्वारा अपेक्षाकृत कम हानिकारक या अहानिकारक पदार्थों में अपघटित किया जा सकता है, निम्नकरणीय प्रदूषक कहलाते हैं। इस श्रेणी में कार्बनिक पदार्थ जैसे लकड़ी, मलमूत्र, कूड़ा करकट इत्यादि आते हैं।
  2. अनिम्नकरणीय प्रदूषक (Non -degradable Pollutants)- ये वे प्रदूषक हैं। जिनका अपघटन सूक्ष्म जीवों द्वारा नहीं हो पाता है। यदि अपघटन होता भी है तो बहुत कम मात्रा में। इस श्रेणी में अकार्बनिक पदार्थ आते हैं जैसे-प्लास्टिक, एल्यूमिनियम, कॉाँच, कीटनाशकों व कवक नाशकों के अवशेष इत्यादि।

कुछ प्रमुख प्रदूषण निम्नलिखित है-

  1. सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid)
  2. एकत्र त्याज्य सामग्री-कालिख, धुआं, टार धूल
  3. कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस
  4. हाइड्रोजन सल्फाइड (Hydrogen Supplied)
  5. सल्फर ऑक्साइड (Sulphur Oxide)
  6. फ्लोरीन एवं फ्लोराइड्स (Fluorine and Fluorides)
  7. क्लोराइड, ब्रोमाइड एवं आयोडीन
  8. धातु – काँसा, लोहा, जिंक, क्रोमियम, एस्बेस्टस के कण।
  9. कीटनाशक, शाकनाशक, फंगस इत्यादि।
  10. प्रकाश जनित रसायन-ऑक्सीकारक, फोटो केमिकल स्मोग (Photochemical smog), ओजोन (Ozone), पेराओक्सीसेंटाइल नाइट्रेट्स (Peroxyacetyl Nitrates), नाइट्रोजन ऑक्साइड (Nitrogen Oxide), अल्डेहाइड्स (Aldehydes) आदि।
  11. कार्बनिक प्रदूषक – बेन्जाइन (Benzine), बेन्जप (Benzyp), ऐसीटिक अम्ल (Acetic Acid) आदि।

साराशंतः जीवमण्डल एक विशाल एवं जटिल ईकोतन्त्र (Ecosystem) है जिसमें अनेक छोटे-छोटे ईकोतन्त्र पाये जाते हैं। इकोतन्त्र में जीवों तथा पर्यावरण के बीच सन्तुलन रहता है। कुछ सीमा तक पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को तुरन्त स्थिर करने की क्षमता ईकोतन्त्र में होती है परन्तु जब कोई जीव विशेष अपनी सुख-सुविधाओं के लिए पर्यावरण के किसी विशेष घटक का अधिक उपयोग कर उसे असन्तुलित रूप में रूपान्तरित कर देता है जिससे पूरा पर्यावरण प्रभावित होता है इसको प्रदूषण कहा जाता है। एक मत के अनुसार, “प्रदूषण जीवों के चारों तरफ की वायु, जल तथा पृथ्वी के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक लक्षणों में होने वालाऐसा अवांछनीय परिवर्तन है, जो मानव जीवन पर, औद्योगिक प्रगति पर, आवास के हालात पर तथा सांस्कृतिक मूल्यों पर दूषित प्रभाव डाल रहा है।”

“मनुष्य पर्यावरण का सबसे बड़ा शत्रु है। इसके क्रिया-कलापों द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण में होने वाले प्रतिकूल फेर बदल को प्रदूषण कहते हैं।”

प्रदूषकों के मुख्य प्रभाव

  1. प्राकृतिक असन्तुलन-जीवों के लिए जल, वायु, भूमि आदि में हानिकारक परविर्तन होना।
  2. जीव उपयोगी पदार्थों के स्रोतों की हानि।
  3. भोज्य पदार्थ देने वाली फसलों की हानि होना।
  4. प्राकृतिक चक्र के असन्तुलित होने से वर्षा, गर्मी तथा सर्दी की ऋतुओं तथा समय चक्र में परिवर्तन होना।
  5. पर्यावरण में असन्तुलन से जीवों को जैविक क्रियाओं में कठिनाई होना।
  6. प्राकृतिक विपदाओं का होना।
  7. 7. मानव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव होना।
  8. प्रदूषण नियन्त्रण, रोग नियन्त्रण आदि पर धन का अपव्यय होना।
  9. पर्यावरण के असन्तुलन से मानव उपयोगी इमारतें, धातु, कपड़ा आदि को हानि होना।
  10. जीवन का असुरक्षित होना।
  11. मृत्यु दर में वृद्धि होना
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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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