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पर्यावरण शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा । पर्यावरण शिक्षा की विशेषतायें | Meaning and definition of environmental education in Hindi | Features of environmental education in Hindi

पर्यावरण शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा । पर्यावरण शिक्षा की विशेषतायें | Meaning and definition of environmental education in Hindi | Features of environmental education in Hindi

पर्यावरण शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा

पर्यावरण-

पर्यावरण शब्द का अर्थ आस-पास या पास-पड़ोस (surrounding) से होता हैं अतः पर्यावरण शब्द परि+ आवरण का मिश्रण है, जिसका अर्थ है कि जो हमें चारों ओर से ढके है, वह हमारा पर्यावरण है। अंग्रेजी भाषा में पर्यावरण के लिए ‘एनवॉयरमेण्ट’ (environment) शब्द का प्रयोग होता है। ‘एनवॉयर’ शब्द का अर्थ है, घंरना या आवृत्त (Encircle) करना तथा ‘मेण्ट’ का अर्थ है, चारों और (Around) अतः एनवॉयरमेण्ट (Environment) का शाब्दिक अर्थ हुआ, चारों ओर से घेरना।

इस प्रकार जो मानव को चारों आर से घेरे रहता है तथा उसको प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न प्रकार से प्रभावित करता है, उसे ही पर्यावरण की संज्ञा दी जाती है।

पर्यावरण शिक्षा-

पर्यावरण शिक्षा का अर्थ है ऐसी शिक्षा जो पर्यावरण के माध्यम से पर्यावरण के बारे में और पर्यावरण के लिये होती है। यूनेस्को (1970) कार्यसमिति के मतानुसार, पर्यावरण शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत मनुष्य तथा उसके पर्यावरण (सांस्कृतिक तथा भौतिक-जैविक) के पारस्परिक सम्बन्ध तथा निर्भरता को समझने का प्रयास किया जाता है और उसको स्पष्ट करने हेतु कौशल, अभिवृत्ति एवं मूल्यों का विकास करते हैं। यह निर्णय लिया जाता है कि क्या किया जाय? जिससे वातावरण की समस्याओं का समाधान किया जा सके और पर्यावरण में गुणवत्ता लाई जा सके।

पर्यावरण शिक्षा व्यक्ति को पर्यावरण से अनुकूल होना ही नहीं सिखलाती बल्कि उसे पर्यावरण को अपने अनुकूल बदलने के लिए भी प्रशिक्षित करती है।

पर्यावरण शिक्षा की प्रमुख परिभाषा निम्नवत् है-

एस. सी. चिट्टीबाबू- “शिक्षा और पर्यावरण के बीच संक्रिया पर्यावरण शिक्षा को जन्म देती है।”

एच. ही हेवासम्, “पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों के अपने उत्तरदायित्वों में पर्यावरण की सुरक्षा और प्रबन्ध के बारे में जागृति पैदा करना है और उसे बढ़ाना है।”

यूनेस्को का फिनिश नेशनल कमीशन, “पर्यावरण शिक्षा पर्यावरण सुरक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने का साधन है। पर्यावरण शिक्षा किसी विज्ञान या विषय के अध्ययन की अलग शाखा नहीं है, इसे जीवन पर्यन्त सम्पूर्ण शिक्षा के अन्तर्गत चलाया जाना चाहिए।

पर्यावरण शिक्षा के अन्तर्गत जीवन पर्यन्त चलने वाली व्यापक शिक्षा सम्मिलित करते हैं जो परिवर्तनशील संसार के प्रति अनुक्रिया करता है। इसके द्वारा व्यक्तियों को प्रशिक्षित करके तैयार किया जाता है जिससे पर्यावरण सम्बन्धी, भौतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक समस्याओं को समझ सकें। व्यक्तियों में कौशल, अभिवृत्तियों तथा मूल्यों का विकास किया जाता है जिससे रचनात्मक योगदान कर सरकें। इसके फलस्वरूप उत्तम स्वास्थ्य तथा जीवन में गुणवत्ता में ला सकें।

पर्यावरण शिक्षा की विशेषता

  1. यह वह प्रक्रिया है जो मनुष्य तथा उसके सांस्कृतिक एवं जैविक वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों का बोध कराता है।
  2. इस प्रक्रिया से मनुष्य को पर्यावरण सम्बन्धी ज्ञान, कौशल, समझ, अभिवृत्तियों, विश्वासों तथा मूल्यों का विकास है जो पर्यावरण में सुधार करती है।
  3. इसमें पर्यावरण के असन्तुलन की पहिचान की जाती है तथा अपेक्षित विकास तथा सुधार का प्रयास किया जाता है।
  4. पर्यावरण शिक्षा में भौतिक, जैविक, सांस्कृतिक तथा मनोवैज्ञानिक पर्यावरण का ज्ञान तथा जानकारी दी जाती है और वास्तविक जीवन में उनकी सार्थकता को समझने का प्रयास किया जाता है।
  5. इसमें पर्यावरण की गुणवत्ता के लिए निर्णय लिया जाता है, अभ्यास किया जाता है जिससे समस्याओं का समाधान किया जा सके।
  6. पर्यावरण शिक्षा से ज्ञान, कौशल, बोध, विश्वास, अभिवृत्तियों तथा मूल्यों का विकास जीवन में रचनात्मक कार्यों हेतु तैयार किया जाता है जिससे जीवन उत्तम बनाया जा सके।
  7. पर्यावरण शिक्षा द्वारा बालक स्वयं प्राकृतिक एवं जैविक वातावरण की समस्याओं के खोजने के समर्थ बनाया जा सकता है तथा उनका समाधान भी स्वयं करता है जिससे जीवन का विकास होता है।
  8. पर्यावरण शिक्षा समस्या-केन्द्रित, अन्तः अनुशासन आयाम, मूल्य तथा समुदाय का अभिविन्यास, भविष्य की ओर उन्मुख, मानव विकास तथा जीवन से सम्बन्धित है। इसका सम्बन्ध भविष्य से होता है।
  9. यह सर्जनात्मक कौशल तथा रचनात्मकता को बढ़ावा देता है। जिससे स्वस्थ जीवन का विकास कर सके।
  10. इसका सम्बन्ध पर्यावरण सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक दोनों पक्षों से होता है जिससे पर्यावरण प्रदूषण को रोक सके और असन्तुलन को दूर कर सके।
  11. इसमें शिक्षा के विभिन्न आयामों, विधियों, प्रविधियों को प्रयुक्त किया जाता है। वास्तविक समस्या के कारण प्रभाव को पहिचानना तथा औपचारिक तथा अनौपचारिक शिक्षा द्वारा समस्याओं का समाधन करना जिससे मनुष्य में गुणवत्ता लाई जा सके।
कुक तथा हैरन (1971) ने पर्यावरण शिक्षा की अधोलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है-

(1) पर्यावरण शिक्षा समस्या केन्द्रित होती है,

(2) पर्यावरण-शिक्षा अन्तः अनुशासन आयाम पर आधारित है,

(3) इसमें मूल्यों का अभिविन्यास किया जाता है,

(4) पर्यावरण शिक्षा से समुदाय का भी अभिविन्यास किया जाता

(5) पर्यावरण शिक्षा भविष्य की ओर उन्मुख होती है तथा

(6) छात्रों के स्वोप्रक्रम, कौशल तथा क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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