राजनीति विज्ञान / Political Science

राजनीतिक दर्शन के इतिहास में बोदोँ का महत्त्व | Bodo’s importance in the history of political philosophy in Hindi

राजनीतिक दर्शन के इतिहास में बोदोँ का महत्त्व

राजनीतिक दर्शन के इतिहास में बोदोँ का महत्त्व | Bodo’s importance in the history of political philosophy in Hindi

राजनीतिक दर्शन के इतिहास में बोदोँ का महत्त्व- बोदाँ को अरस्तू के बाद राजदर्शन का सबसे बड़ा विचारक माना जाता है क्योंकि उसने राजनीति के सिद्धांतों के निर्धारण में जिस ऐतिहासिक और पर्यवेक्षणात्मक पद्धति का अनुगमन किया था, बोदोँ की पद्धति उससे कहीं अधिक विकसित थी।

बोदों ने प्रभुसत्ता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। उसने बतलाया कि राज्य के आवश्यक तत्वी में सबसे परम आवश्यक तत्त्व प्रभुसत्ता है। वह केवल राज्य में ही निहित होती है। राज्य की एकता के लिये उसने इसे आवश्यक माना है।

डनिग ने लिखा है कि बोदाँ अरस्तू के पश्चात् अपने स्वरूप और पद्धति से पदच्युत् राजनीति सिद्धान्त को उसके वास्तविक रूप में वापिस लाया और उसने उसे पुनः विज्ञान का वाह्य रूप प्रदान किया। मैकियावेली की दृष्टि क्रियात्मक राजनीति तक सीमित थी, बोदाँ ने इसे विशाल और पूर्ण बनाते हुये इसमें राज्य के मौलिक प्रश्नों का चिन्तन किया और इसे आधुनिक राजनीतिशास्त्र का रूप प्रदान किया। इसके अतिरिक्त बोदाँ ने नागरिकता, राज्य एवं शासनतन्त्रों के प्रकार पर विचार किया। बोदाँ को यद्यपि एक महान् दार्शनिक की कोटि में नहीं रखा जा सकता है। किन्तु राजनैतिक चिन्तन के इतिहास में उसका एक महत्वपूर्ण स्थान है। और वह आधुनिकता का संस्थापक है। प्रो० भण्डारी ने बोदाँ के विषय में लिखा है कि :-

“Bodin may be reckoned as one of the great political thinkers of the West. His De Republique was the first comprehensive work on sovereignty.”

इसमें कोई संदेह नहीं कि मैकियावेली के विचार आधुनिकता से ओत-प्रोत हैं। वह अपने युग से काफी आगे था। परन्तु बोदाँ ने राजनीतिक चिन्तन को क्रम-बद्ध तथा सैद्धांतिक स्वरूप प्रदान करके उसका आधुनिकीकरण किया। इस कारण उसी को आधुनिक राजनीतिक चिन्तन का जनक माना.जाता है। परन्तु साथ ही यह भी सत्य है कि बोदाँ अनेक परम्पराओं एवं मान्यताओं का समर्थन करता रहा। इसी कारण सैबाइन महोदय ने लिखा है-

“Bodin’s political philosophy is a singular mixture of old and new, as political thought in the sixteenth century was. He had ceased to be medieval without becoming modern.

-Sabine.

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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