विक्रय प्रबंधन / Sales Management

विक्रयकर्त्ताओं को अभिप्रेरणा की आवश्यकता | विक्रयकर्त्ताओं को अभिप्रेरणा का महत्त्व | विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने की प्रमुख विधियाँ

विक्रयकर्त्ताओं को अभिप्रेरणा की आवश्यकता | विक्रयकर्त्ताओं को अभिप्रेरणा का महत्त्व | विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने की प्रमुख विधियाँ | Sellers need motivation in Hindi | Importance of Motivation to Salespeople in Hindi | Main methods of motivating sellers in Hindi

विक्रयकर्त्ताओं को अभिप्रेरणा की आवश्यकता एवं महत्त्व

विक्रयकर्ताओं को अभिप्रेरित करना या अभिप्रेरणा देने की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है-

  1. कार्य की प्रकृति- विक्रयकर्ता का कार्य सभी प्रकार के कार्यों से भिन्न होता है। यह एक कठिन कार्य होता है। इसमें विक्रयकर्ताओं को बहुत परिश्रम करना पड़ता है। यह एक ऐसा कार्य है, जिसमें विक्रयकर्ता को पग-पग पर निराशा का सामना करना पड़ता है। भिन्न-भिन्न प्रकृति के व्यक्तियों से भिन्न-भिन्न प्रकार की बातें सुनने को मिलती हैं। कार्य की ऐसी प्रकृति के परिणामस्वरूप ही विक्रयकर्त्ताओं को अपने कार्य के प्रति कभी-कभी बड़ी अरुचि उत्पन्न हो जाती है। कभी-कभी वे अपने कार्य की सफलता के प्रति निराश भी हो जाते हैं। ऐसे समय उन्हें अभिप्रेरित करने की सर्वाधिक आवश्यकता होती है।
  2. कार्यों का दोहराव- विक्रयकर्ता को अभिप्रेरित करने की आवश्यकता इसलिए भी पड़ती है कि विक्रयकर्त्ता का कार्य सदैव लगभग समान ही रहता है। उदाहरणार्थ, एक दवा कम्पनी का विक्रयकर्त्ता है तो वह एक डॉक्टर से दूसरे तथा तीसरे डॉक्टर के पास अपनी एक ही दवाई के गुणों को बताता रहेगा। इससे उसे बड़ी थकावट महसूस होती है तथा कार्य के प्रति उसमें अरुचि उत्पन्न होने लगती है।
  3. व्यक्तिगत समस्याएँ- अधिकांश भ्रमणशील विक्रयकर्ताओं को अधिकांश समय के लिए घर से दूर रहना पड़ता है। वे अपने पारिवारिक सदस्यों के बीच रहने के आनंद से वंचित तो रहते ही हैं, साथ ही साथ उनके पारिवारिक सदस्यों को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनकी अनुपस्थिति में कभी भी कोई सदस्य बीमार पड़ सकता है, घर में किसी प्रकार की विपत्ति सकती है। लेनदार तकाजे के लिए आ सकते हैं। इन सब बातों का सामना पारिवारिक सदस्यों को करना पड़ता है और विक्रयकर्ता दूर बैठा सुनकर भी कुछ करने की स्थिति में नहीं होता है। इस प्रकार इस तरह के विलगाव को सहन करने के लिए बाध्य करने हेतु अभिप्रेरणा देनी पड़ती है।
  4. समूह भावना का विकास- विक्रयकर्त्ता सामान्यतः संस्था से काफी दूर होते हैं तथा वे अपने सहकर्मियों से बहुत कम मिल पाते हैं। अतः उन्हें संगठनात्मक दृष्टि से भी काफी अकेलापन महसूस होता है। इसीलिए समय-समय पर सभाएँ व सम्मेलन बुलाकर उनको एकत्रित होने का अवसर देना चाहिए तथा उनमें समूह भावना उत्पन्न करनी चाहिए।
  5. कार्य कुशलता में वृद्धि करना- विक्रयकर्ताओं की कार्यकुशलता में वृद्धि करने के लिए भी विक्रयकर्ताओं को अभिप्रेरणा देने की आवश्यकता पड़ती है। उनकी छिपी हुई क्षमताओं का उपयोग करने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती है।
  6. विक्रयकर्त्ताओं की आवश्यकता की संतुष्टि- उत्प्रेरणा की आवश्यकता विक्रयकर्ताओं की शारीरिक, सामाजिक एवं मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है। कभी-कभी शारीरिक आवश्यकताओं की अपेक्षा मानसिक एवं सामाजिक आवश्यकताएं इतनी महत्त्वपूर्ण होती हैं कि उन्हें संतुष्ट किए बिना विक्रयकर्ताओं में कार्य के प्रति लगन उत्पन्न करना सम्भव नहीं तो कठिन अवश्य ही हो जाता है।

विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने की प्रमुख विधियाँ

विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष वित्तीय प्रेरणाएँ- प्रत्यक्ष वित्तीय प्रेरणाओं का सम्बन्ध विक्रयकर्ताओं के विक्रय कार्य से होता है। इसके कार्यों के आधार पर दी जाने वाली नकद राशि विक्रयकर्ता को अभिप्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। अप्रत्यक्ष वित्तीय प्रेरणाओं का विक्रयकर्ता के कार्य से प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं होता लेकिन उसकी सुरक्षा एवं सुविधा के लिए प्रेरणाएं दी जाती हैं। जैसे- पेंशन देना, अधिलाभांश देना, संस्था के लाभों में भाग देना आदि।
  2. पपदोन्नत– पदोन्नति से आशय किसी कर्मचारी के पद में वृद्धि करने से है जिसके परिणामस्वरूप उसकी आय, प्रतिष्ठा तथा उत्तरदायित्वों में वृद्धि होती है। अतएव विक्रयकर्ता को प्रेरणा प्रदान करने के लिए उसकी पदोन्नति की जा सकती है।
  3. पुरस्कार- विक्रयकर्ता को अभिप्रेरित करने के लिए समय-समय पर पुरस्कार दिये जा सकते हैं। ये पुरस्कार नकद में, वस्तु के रूप में, निःशुल्क भ्रमण, विशिष्ट वेतन आदि देकर किये जा सकते हैं।
  4. अधिक उत्तरदायित्व- कुछ विक्रयकर्ताओं में अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य करने की आकांक्षा होती है। वे सामान्य कार्य के अतिरिक्त सौंपे गये उत्तरदायित्व को बड़े उत्साह से पूर्ण करते हैं। ऐसे विक्रयकर्त्ताओं को उनकी इच्छा के अनुरूप अधिक उत्तरदायित्व कार्य सौंपकर उन्हें अभिप्रेरित किया जा सकता है।
  5. सहभागिता– सहभागिता के अंतर्गत विक्रयकर्ताओं को विक्रय प्रबंध के साथ बैठकर मुख्य निर्णयों के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट करने का अवसर मिलता है।
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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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