भूगोल / Geography

रैवेनस्टीन का प्रवास नियम | Ravenstein – The laws of migration in Hindi

रैवेनस्टीन का प्रवास नियम Ravenstein – The laws of migration
रैवेनस्टीन का प्रवास नियम Ravenstein – The laws of migration

रैवेनस्टीन का प्रवास नियम | Ravenstein The laws of migration in Hindi

रैवेनस्टीन का जन्म 30 दिसंबर 1834 में हुआ था, यह प्रमुख रूप से फ्रैंकफर्ट के मूल निवासी थे जो कि जर्मनी में स्थित है | रैवेनस्टीन एक जर्मन अंग्रेजी भूगोल के मानचित्र कार्य थे | इनका प्रवास सिद्धांत जनरल ऑफ द स्टेटिस्टिकल सोसाइटी लंदन मे हुआ था | यह जनरल स्टेटिस्टिकल के ब्लैकवेल पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित था | इनका यह सिद्धांत 1385 में प्रकाशित हुआ | यूनाइटेड किंगडम में प्रवास के आधार पर अपने कुछ टिप्पणियां दिया |

 इन्होंने दिया 1880 के दशक में मानव प्रवास के एक सिद्धांत की स्थापना की जो अभी भी आधुनिक प्रवाह सिद्धांत का आधार बनती है | मानव प्रवास के संबंध में सैद्धांतिक विवेचन तथा किसी सिद्धांत के प्रतिपादन का प्रथम उल्लेखनीय प्रयास रैवेनस्टीन का माना जाता है जिन्होंने सन 1885 में प्रवास के नियम की रूपरेखा प्रस्तुत की | उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के काउंटी स्तर पर होने वाले प्रवासियों के अनुभव के आधार पर प्रवास के नियम का प्रतिपादन किया था |

रैवेनस्टीन के प्रवाह सिद्धांत के मॉडल के 11 नियम आधार हैं जो की रूपरेखा प्रदान करते हैं प्रवाह सिद्धांत को –

  1. प्रवास और दूरी

अधिकांश प्रवासी लघु दूरी तक स्थानांतरित होते हैं जिसके परिणाम स्वरूप जनसंख्या में स्थानीय परिवर्तन एक सर्वव्यापी घटना प्रतीत होती है | इससे प्रवास धारा उत्पन्न होती है जो कि वृहत व्यापारिक तथा औद्योगिक केंद्रों की ओर अग्रसर होती रहती है | इसका कारण यह है कि इन केंद्रों में अधिकाधिक प्रवासियों को धारण करने की क्षमता विद्यमान होती है | यह नियम दो प्रकार से क्रियाशील होता है |

अ – दूरी क्षय कार्य जिसके अनुसार दूरी बढ़ने के साथ-साथ प्रवास की मात्रा घटती जाती है, और

ब – लंबी दूरी के प्रवासी व्यापारिक तथा औद्योगिक केंद्रों को प्राथमिकता देते हैं |

  1. अवस्थाओं में प्रवास (पदानुक्रम प्रवास)

पहले ग्रामीण क्षेत्र के लोग तीव्र गति से बढ़ते हुए अपने समीपवर्ती नगर में एकत्रित होते हैं जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में रिक्तियां उत्पन्न हो जाती हैं | यह प्रवास ग्रामीण से लघु नगर की ओर फिर बृहत नगर की ओर और आगे बढ़ता चला जाता है |

  1. वाणिज्य केंद्र

यहां वाणिज्य केंद्र के अंतर्गत प्रवाह भार की बात की गई है जो कि इन क्षेत्रों में होते हैं तथा कितनी संख्या में लोग जाते हैं | प्रवासियों के लंबे समय तक चलने वाले प्रवाह आमतौर पर वाणिज्य के महान केंद्रों में से एक के लिए वरीयता से जाना जाता है |

  1. धारा और पति धारा

प्रत्येक प्रवास की प्रमुख धारा से रिक्तियां उत्पन्न होती हैं जिनकी पूर्ति के लिए प्रति धारा का जन्म होता है इस प्रकार प्रवास की प्रमुख धारा प्रति धारा को उत्पन्न करती है |

  1. ग्रामीण नगरीय विभेद

नगर निवासियों में ग्रामीण वासियों की तुलना में प्रवाह की प्रवृत्ति कम पाई जाती है | इसका कारण यह है कि नगरीय केंद्रों पर जीवन की अन्य सुविधाओं के साथ ही रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होते हैं जिससे नगर वासियों को अवसर उपलब्ध होते हैं जिससे नगर वासियों को बाहर जाने की आवश्यकता कम होती है |

  1. स्त्रियों की बहुलता

लघु दूरी के प्रवास में स्त्रियों की बहुलता पाई जाती है | लंबी दूरी के प्रवास में स्त्रियों की भागीदारी बहुत कम होती है | स्त्रियां मुख्यतः अपने जन्म स्थान को छोड़कर प्रवास कर जाती है परंतु यह दैनिक दूरी का प्रवास होता है जबकि पुरुष वर्ग जोखिम उठाता है तथा अधिक दूरी का प्रवास करता है |

  1. प्रवासियों में युवा वर्ग ज्यादा

प्रवासियों में युवा वयस्क वर्ग ज्यादा प्रवास करता तथा उनके साथ परिवार शायद ही कभी प्रवास करता है | वयस्क आयु वर्ग वाले लोग ज्यादा प्रवास करते हैं 28% लगभग लोग 20 वर्ष के अंदर के होते हैं तथा यह अपना मूल स्थान छोड़कर प्रवास करते हैं | 25%  पुरुष तथा 25% महिलाएं भी युवा प्रवास में शामिल होती हैं | युवा व्यक्ति अपने परिवार के साथ नहीं प्रवास करना चाहते तथा वे नयी जगह को देखना एवं समझना चाहते हैं तथा युवा प्रवास मुख्यतः प्रायः ज्ञान की दिशा में देखने को प्राप्त होता है |

  1. प्रवास के कारण महानगरों का निर्माण

बड़े बड़े कस्बो का निर्माण प्रवास के कारण अधिक होता है यहां एक इंग्लैंड (यूनाइटेड किंगडम) का एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है | इंग्लैंड में प्राकृतिक जनसंख्या प्रारंभ में कम थी जिससे की जगह कम विकसित हो पाई थी जब यहां प्रवास हुआ तो क्षेत्र विकसित होता चला गया | कहने का अर्थ है यहां यह जनसंख्या जो वहां प्रवास के दौरान निवास करती थी वह वहां अपने ज्ञान से उस क्षेत्र का विकास करेगी अर्थात जहां सिर्फ प्रवास के द्वारा क्षेत्र का विकास ही नहीं बल्कि ज्ञान का पहला एवं विस्तार हो रहा है |

  1. प्रवास द्वारा बुनियादी ढांचे में सुधार

यदि कहीं पर प्रवास होता है तो प्रवासित जनसंख्या को सुख सुविधा प्रदान करने हेतु वहां के बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाता है | यदि कहीं उद्योग लगा होता है तो यातायात की सुविधा शुरू होती है यातायात की सुविधा होने के पश्चात यहां दैनिक प्रवाह देखने को मिलता है | उद्योग होने के बाद वहां बाजार एवं ऐसे कुछ मुख्य नगर विकसित होते हैं जो कि मुख्य नगर बन जाते हैं | यह विकास प्रवास के द्वारा ज्यादा देखने को मिलते हैं |

  1. तकनीकी विकास एवं प्रवास

प्रवास की प्रमुख दिशा कृषि क्षेत्र से उद्योग एवं वाणिज्य केंद्रों के लिए है | तकनीकी विकास या प्रगति के साथ-साथ जनसंख्या के प्रवास की मात्रा में वृद्धि होती है तथा औद्योगिक प्रगति के साथ प्रवास की मात्रा बढ़ती है | जैसा कि इंग्लैंड के दक्षिण भाग से लोग गांव से निकल कर वहां से मध्य भाग में जा रहे हैं तथा वहां औद्योगिक प्रदेशों में बस रहे हैं | यहां सिर्फ गांव से नहीं बल्कि यहां पर तकनीकी एवं व्यापार हेतु लोग शहरों से भी निकल कर महानगरों की तरफ प्रवास कर रहे हैं | औद्योगिक एवं तकनीकी के आकर्षण द्वारा प्रवास की मात्रा अधिक होती है |

  1. आर्थिक उद्देश्य की प्रमुखता

प्रवास आर्थिक एवं अनार्थिक दोनों ही उद्देश्यों से होता है किंतु इनमें आर्थिक उद्देश्य ही सर्वोपरि होता है अर्थात प्रवास मात्रा धारण करने वाले घटकों में आर्थिक उद्देश्य की प्राथमिकता होती है | नौकरी एवं मजदूरी की तरफ प्रवाह, कम विकसित से विकसित क्षेत्र की तरफ प्रवाह आर्थिक कारणों द्वारा ही होता है अतः हम कह सकते हैं कि आर्थिक तत्व की वजह से आर्थिक कारणों द्वारा भी लोग प्रवास कर रहे थे |

सिद्धांत की कमियां तथा अच्छाइयां

सिद्धांत की कमियां

  1. रैवेनस्टीन द्वारा नियम के नियम की बात इंग्लैंड के संदर्भ में की गई तथा जबकि रैवेंस्टीन द्वारा यह नियम पूरे विश्व के लिए प्रतिपादित होना चाहिए था |
  2. साथ ही साथ रैवेनस्टीन द्वारा प्रतिपादित प्रवास नियम में पूरे विश्व को नहीं लाया जा सकता है क्योंकि पूरे विश्व के लोग अलग-अलग जलवायु एवं वातावरण में रहते हैं तथा यहां पर यह थोड़ा समस्या दायी नियम प्रतीत होता है |
  3. रैवेनस्टीन द्वारा लघु दूरी के प्रवास को अधिक महत्व दिया गया जबकि यह देखा गया है कि लोग बाहर एवं लंबी दूरी के भी प्रवास करते हैं |
  4. नियम में रैवेनस्टीन ने आर्थिक कारण को एक महत्वपूर्ण कारण माना प्रवास करने हेतु परंतु अब के आधुनिक समय में यह आर्थिक कारणों द्वारा प्रवास को कम देखा जाता है |

सिद्धांत की अच्छाइयां

  1. प्रायः रैवेनस्टीन ने लघु दूरी के प्रवास नियम को बताया जो कि दैनिक प्रवास इत्यादि में होता है तथा यह नियम को एक सार्थक नियम ले सकते हैं |
  2. रैवेनस्टीन ने अवस्थाओं में प्रवास नियम को अपनाया जो कि एकदम सही प्रतीत होता है |
  3. रैवेनस्टीन ने एक प्रवास नियमों द्वारा सिद्धांतों के लिए जो कि अब अन्य आधार प्रदान किया कि बाकी भूगोलवेत्ताओं द्वारा भी इस सिद्धांत को आधार मानकर इसके अनुसार या इसके द्वारा सिद्धांत का निर्माण किया जाता है |
  4. यह प्रवास नियम कुछ क्षेत्र में सार्थक सिद्ध भी हुए हैं जैसे- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड इत्यादि |

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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