इतिहास / History

विभिन्न स्तरों पर इतिहास-शिक्षण के उद्देश्य | Aims of teaching History at the different stages in Hindi

विभिन्न स्तरों पर इतिहास-शिक्षण के उद्देश्य
विभिन्न स्तरों पर इतिहास-शिक्षण के उद्देश्य

विभिन्न स्तरों पर इतिहास-शिक्षण के उद्देश्य | Aims of teaching History in Hindi

विभिन्न स्तरों पर इतिहास-शिक्षण के उद्देश्य

(1) प्राइमरी स्तर पर इतिहास-शिक्षण के उद्दश्य –

इतिहास के शिक्षण को इस स्तर पर अधोलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर विषय-वस्तु का प्रस्तुतीकरण करना चाहिए-

(i) इतिहास के प्रति छात्रों की रुचि जाग्रत करना। इसको जाग्रत करने के लिए न तो अधिक सूचनाएँ प्रदान की जायें और न उनके मस्तिष्कों को परीक्षा के निरर्थक भार से लॉदा जाय। Miss Drummond एवं Ryburn के अनुसार, “बालकों को यह अनुभव करने दिया जाय कि इतिहास रोचक है यह हमारे दैनिक जोवन पर वास्तविक प्रमाव डालता है और इस कारण उसके तथ्यों को आत्मसात करने के लिए कष्ट उठाना उपयुक्त एवं महत्वपूर्ण है।” (So make pupils feel History is interesting, that it has a real bearing on our everyday life, and that it is, therefore, worth-while taking trouble to assimilate its facts.)

(ii) छात्रों में ऐतिहासिक कल्पना जाग्रत करना। इसके लिए इतिहास-शिक्षण को कहानियों के द्वारा शिक्षण प्रदान करना चाहिए; क्योंकि इस स्तर का छात्र कहानी-प्रिय होता है। इस सम्बन्ध में फिडले महोदय का मत है कि “प्रारभ्मिक स्तर पर इतिहास शुद्ध रूप से कहान है और बालक में ऐतिहासिक कल्पना उत्पनम्न करने का सबसे उपयुक्त साधन है।” (History at this stage, is purely story and the surest way of rousing in the child a vivid historical imagination.)

(iii) छात्रों को इस बात से परिचित कराना कि हमारे दैनिक जीवन पर अतीत का प्रभाव पड़ता है ।

(iv) छात्रों में समय-ज्ञान को धीरे धीरे विकसित करना। इसके लिए शिक्षक को स्थूलात्मक साधनों का उपयोग करना चाहिए।

(v) छात्रों में देश-प्रेम की मावना का विकास करना जिससे भविष्य में उनका राष्ट्रीय चरित्र निर्मित हो सके।

(2) जूनियर स्तर पर इतिहास-शिक्षण के उद्दश्य –

इस स्तर पर निम्नलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर इतिहास की पाठ्यवस्तु का प्रस्तुतीकरण करना चाहिए-

(i) इस स्तर पर छात्रों को इतिहास के लिए रुचि को दृढ़ किया जाय।

(ii) छात्रों को शुद्ध चिन्तन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाय। इसके अतिरिक्त उनकी अन्य मानसिक शक्तियों के उपयोग के लिए सुअवसर प्रदान किये जाएँ, जिससे उन का मानसिक विकास सम्भव हो सके।

(ii) बालकों को ऐतिहासिक तथ्यों तथा कार्यों की आलोचना करने के लिए प्रोत्साहित किया जाय ।

(iv) छात्रों में देश-प्रेम के साथ-साथ विश्व-बन्धुत्व की भावना को विकसित करना।

(v) मानचित्र पर घटनगओं सम्बन्धी स्थलों तथा राज्य-सीमा का ज्ञान कराकर भौगोलिक स्थिति से परिचित कराना।

(vi) छात्रों में समय-ज्ञान विकसित करना।

(3) हायर सेकण्डरी स्तर पर इतिहास-शिक्षण के उद्दश्य –

इस स्तर पर निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए इतिहास की पाठ्यवस्तु का प्रतिपादन होना चाहिए-

(i) छात्रों का मानसिक विकास करना। इस सम्बन्ध में भाटिया तथा भाटिया का मत है कि “इतिहास स्मृति तथा एकाग्रता को शक्ति को प्रशिक्षित करता है। यह बालकों की तर्क तथा निर्णय-शक्तियों एवं तथ्यों को तारकिक क्रम में रखकर सुधारता है और प्रमाणों को परीक्षित करने के अवसर प्रदान करता है।” (History trains memory and power of concentration. It improves the reasoning and judgment of pupils by presenting facts in logical sequence and by providing opportunities for weighing evidence and for shifting the right from the wrong.)

(ii) समय-ज्ञान के विकास को दृढ़ करना।

(iii) भूतकाल के आधार पर वर्तमान को समझने की क्षमता उत्पन्न करना।

(iv) मानव सभ्यता के विकास की विशेषताओं का ज्ञान प्रदान करना।

(v) छात्रों में आलोचनार्मक एवं वैज्ञानिक हृष्टिकोण उत्पन्न करना।

(vi) छात्रों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृतियों से अवगत कराना जिससे वे समझ सकें कि हमारी राष्ट्रीय संस्कृति ने मानव संस्कृति को क्या देन प्रदान की औौर दूसरी संस्कृतियों ने हमें किस सोमा तक एवं किस क्षेत्र में प्रभावित किया है।

(vii) बालकों के भावनात्मक विकास (Emotional Development) में सहयोग प्रदान करना।

(viii) राष्ट्र की ‘विभिन्न समस्याओं एवं उनको हल करने की तत्परता उत्पन्न करना जिससे वे अपने भावी जीवन में आदर्श नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का वहन कर सकें।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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