विपणन प्रबन्ध / Marketing Management

विपणन का आशय | विक्रयण का आशय | विपणन दर्शन और प्रबन्ध | विपणन की मुख्य विशेषताएँ

विपणन का आशय | विक्रयण का आशय | विपणन दर्शन और प्रबन्ध | विपणन की मुख्य विशेषताएँ | Meaning of Marketing in Hindi | Intent of sale Marketing in Hindi | Philosophy and Management in Hindi | Key Features of Marketing in Hindi

विपणन का आशय

(Meaning of Marketing)

विपणन का व्यावसायिक क्रियाओं में प्रथम स्थान है। आधुनिक विपणन विचार के अनुसार विपणन क्रिया वस्तु विचार से प्रारम्भ होकर ग्राहक संतुष्ट होने पर समाप्त होती है अर्थात् विपणन के अन्तर्गत उत्पादन से पूर्व और ग्राहक संतुष्टि तक की जाने वाली सभी क्रियाएँ सम्मिलित होती है। विलियम जे0 स्टेण्टन के अनुसार, ” विपणन का आशय उन अर्न्तसम्बन्धित व्यावसायिक क्रियाओं की सम्पूर्ण प्रणाली से है जिसका उद्देश्य वर्तमान एवं भावी ग्राहकों की आवश्यकता संतुष्टि करने वाली वस्तुओं और सेवाओं का नियोजन, कीमत निर्धारण, संवर्द्धन एवं वितरण करना है।” अतः स्पष्ट है कि विपणन के अन्तर्गत सर्वप्रथम ग्राहकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया जाता है, उसके अनुसार वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करके ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है और ग्राहकों की संतुष्टि के लिए हर सम्भव प्रयास किये जाते हैं।

विक्रयण का आशय

(Meaning of Selling)

विक्रयण विपणन कार्यों में एक प्रमुख कार्य है। साधारण अर्थ में विक्रेता की वस्तु को धन में परिवर्तित करने की कला को विक्रयण कहते हैं। वास्तव में, विक्रयण का अभिप्राय किसी वस्तु के क्रेताओं की खोज करने, उनको वस्तु विशेष के सम्बन्ध में जानकारी देने और क्रेताओं को वस्तु को खरीदने के लिए तैयार करके उन्हें बेच देना है। सार रूप में, निर्मित वस्तुओं को उपभोक्ता तक पहुँचाना ही विक्रयण है। विक्रयण के अन्तर्गत ग्राहकों का पता लगाना, विक्रय योजना बनाना, वितरण श्रृंखला का चयन करना, विज्ञापन, विक्रय की शर्तों का निर्धारण, ब्रान्डिंग, पैकिंग आदि कार्य सम्मिलित किये जाते हैं।

विपणन दर्शन और प्रबन्ध (Marketing Philosophy and Management)

प्रबन्ध के प्रति विपणन दर्शन के योगदान को अग्रांकित शीर्षकों के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है:

  1. उत्तरदायित्व (Responsibilities) – व्यावसायिक योजनाओं एवं रीति-नीतियों (Strategies) को उपभोक्ता-अभिमुखी बनाकर व्यावसायिक नियोजन कार्य आंशिक रूप से उत्तरदायी हाथों में सौंपा जा सकता है।
  2. निर्णय (Decisions) –उपभोक्ताओं को केन्द्रबिन्दु न बनाकर लिये गये निर्णय व्यवसाय के लिए हानिप्रद सिद्ध हो सकते हैं। प्रायः एक गलत निर्णय को सुधारने के लिए किये जाने वाले व्यर्थ प्रयासों के अन्तर्गत अनेक गलत निर्णय लेने पड़ते हैं।
  3. समन्वय (Co-ordination) – उत्पाद डिजाइन, कीमत निर्धारण और इंजीनियरिंग विकास आदि कार्य उपभोक्ता स्थिति की स्पष्ट जानकारी के पश्चात ही शुरू किये जाने चाहिए।

विपणन की मुख्य विशेषताएँ

(Main Characteristics of Marketing)

विपणन की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

  1. एक मानवीय क्रिया (A Human Activity) – विपणन एक मानवीय क्रिया है। यह मनुष्यों द्वारा मनुष्यों के लिए ही सम्पन्न की जाने वाली क्रिया है। इस कार्य में यंत्रों का उपयोग अवश्य किया जाने लगा है, किन्तु इसकी सफलता मानवीय प्रयासों पर ही निर्भर करती है।
  2. गतिशील एवं अविच्छिन्न प्रक्रिया (Dynamic and continuous process) – विपणन एक गतिशील एवं अविच्छिन्न प्रक्रिया है, जो इस गतिशील वातावरण में निरन्तर रूप से चलती रहती है। विपणन का सम्पूर्ण वातावरण गतिशील है। यह प्रक्रिया इसी गतिशील वातावरण में निरन्तर रूप में चलती रहती है।
  3. विभिन्न कार्यों की प्रक्रिया (A process of various functions) – विपणन विभिन्न कार्यों की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में माल, सेवाओं तथा विचारों की संकल्पना, मूल्य निर्धारण, संवर्द्धन या प्रचार प्रसार तथा वितरण के कार्य सम्पन्न किये जाते हैं। अधिक स्पष्ट रूप में, इस प्रक्रिया में विपणन अनुसंधान, उत्पाद विकास एवं नियोजन, मूल्य निर्धारण, विज्ञापन, विक्रय संवर्द्धन, वैयक्तिक विक्रय, माल के भण्डारण एवं वितरण आदि कार्य सम्पन्न किये जाते हैं।
  4. विनिमय विपणन का आधार (Exchange is the basis of marketing) – विनियम विपणन का आधार है। बिना विनिमय के विपणन का अस्तित्व ही संभव नहीं है। कोटलर के अनुसार, विपणन का अस्तित्व तब उत्पन्न होता है जबकि लोग विनिमय द्वारा अपनी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं को संतुष्ट करने का निर्णय लेते है।।
  5. सामाजिक-आर्थिक क्रिया (Socio-economic activity) – विपणन केवल आर्थिक क्रिया नहीं है, बल्कि एक सामाजिक आर्थिक क्रिया है। इसका उद्देश्य लाभ कमाना है किन्तु समाज या सामाजिक प्राणियों की संतुष्टि के माध्यम से यह एक ऐसी किया है जो समाज के लोगों द्वारा समाज के लिए की जाती है, किन्तु इसके पीछे आर्थिक उद्देश्य भी होता है।
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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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