इतिहास / History

इतिहास के भेद | इतिहास के प्रमुख प्रकार | History differences in Hindi | Major types of history in Hindi

इतिहास के भेद | इतिहास के प्रमुख प्रकार | History differences in Hindi | Major types of history in Hindi

इतिहास के भेद

प्राचीनकाल से ही इतिहासकारों ने धार्मिक और राजनीतिक घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया है। आजकल वे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, विधिक एवं विश्व इतिहास पर भी ध्यान दे रहे हैं। सुविधा के दृष्टिकोण से इतिहास के निम्नलिखित भेदों का अध्ययन किया जा सकता है-

  1. राजनीतिक इतिहास—

प्राचीनकाल से ही राजनीतिक इतिहास लिखने की परंपरा रही है। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि मानव जाति के विकास के शीर्ष पर राजनेता, राजा, राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री या सांसद ही रहे हैं। उनके साथ राजनीतिक संस्थाओं-विदथ, सभा, समिति, संसद, अन्तर्राष्ट्रीय संगठन, निगम, कम्यून, राजनीतिक दल, पंचायत आदि का भी अध्ययन किया गया है। प्रत्येक समाज में मुट्ठी भर लोगों ने ही शेष लोगों की अपेक्षा उन्हें ही अधिक महत्त्व दिया गया है। वे समाज के निर्माता या रहनुमा थे। अतः इतिहासकारों ने उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान दिया है। दरबारी इतिहासकार अपने कृपापात्र नरेश के यशोगान में लगे रहते थे। यही कारण है कि हरिषेण की प्रयाग-प्रशस्ति, गुलबदन का हुमायूँनामा व अबुलफजल की आइन-ए-अकबरी जैसे ऐतिहासिक ग्रन्थों की रचना सम्पन्न हुई। यहाँ तक कि सरकारी आदेश या राजाज्ञा का सम्बन्ध भी शासकों की राजनीतिक एवं सैनिक उपलब्धियों से होता था। फलतः इतिहासकारों के पास इतिहास-संरचना के मुख्य साधन राजनेताओं की राजनीतिक घटनाएँ थीं। उन्होंने आम जनता से कोई सम्पर्क व संबंध नहीं रखा और उनके बारे में कहीं जिक्र नहीं किया। किन्तु आज समय ने पलटा खाया है तथा इतिहासकार इतिहास के गैर-राजनीतिक पक्ष पर अधिकाधिक ध्यान दे रहे हैं। वे यह समझने लगे हैं कि इतिहास का निर्माण राजनेता ही नहीं आम लोग भी करते हैं।

  1. सामाजिक इतिहास-

सामाजिक इतिहास का जन्म हाल में हुआ है। यह लोगों के सामाजिक जीवन का अध्ययन करता है। इस संदर्भ में यह धर्म, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, नैतिकता, आचार-व्यवहार, भोजन, वस्त्र, कला, संस्कृति आदि का अध्ययन करता है। इसमें राजनीतिक, वंशीय व संवैधानिक इतिहास की उपेक्षा की जाती है। सर्वप्रथम रील (Riehl) और फ्रेटेग (Freytag) नामक जर्मन विद्वानों ने सामाजिक इतिहास की ओर ध्यान दिया। उन्होंने मध्यकालीन और आधुनिक जर्मनी के सामाजिक जीवन के बारे में लिखा है। लुडविग फ्रायडलैंड और पॉल लेक्रोई ने भी सामाजिक इतिहास की रचना की। इंगलैंड में ट्रेल (Traill) और मैन (Mann) ने भी सामाजिक इंगलैंड (सोशल इंगलैंड) की रचना की। इसी तरह ट्रेवेलियन ने इंगलैंड का सामाजिक इतिहास (सोशल हिस्ट्री ऑफ इंगलैंड) लिखा है।

  1. आर्थिक इतिहास-

19वीं शताब्दी में आर्थिक इतिहास का विकास हुआ। वणिकवाद युग (Mercantilism) में आर्थिक इतिहास में अभिरुचि ली जाने लगी। फलतः एडम स्मिथ ने ‘विश्व धन’ (The Wealth of Nations) की रचना की। इस पुस्तक ने फ्रांस के अर्थशास्त्रियों—तु(Turgot), नेकर (Necker) आदि को काफी प्रभावित किया। उन्होंने भी एडम स्मिथ की व्यक्तिवादी अर्थव्यवस्था (Laissez faire) का समर्थन किया। जर्मन प्रोफेसर हिरेन (Heeren) ने आर्थिक इतिहास के विकास पर काफी योगदान दिया। 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में व्यापारिक विवाद के फलस्वरूप जर्मनी में ऐतिहासिक अर्थशास्त्रियों का एक सम्प्रदाय (German School of Historical Economists) कायम हो गया। औद्योगिक क्रांति के पश्चात् आर्थिक इतिहास में और भी अधिक अभिरुचि ली जाने लगी। आर्थिक संस्थाओं का विशद अध्ययन किया जाने लगा।

  1. विधिक इतिहास-

इतिहास की अन्य अधुनातम शाखा विधिक इतिहास (Legal Hitory) है। जिन इतिहासकारों ने विधिक इतिहास लिखा है उन्होंने यह दिखलाने का प्रयास किया है कि किस तरह परिवर्तित सामाजिक परिस्थितियों में विधि-विकास ने सामंजस्य स्थापित किया है। विधिक इतिहासकारों में आस्ट्रिया के गमालोविज (Gumplowicz), जर्मनी के गिर्क (Gierke), इहरिंग (Ihering), ब्रूनर (Brunner), कोहलर (Kohler), विगमोर (Wigmore), पाउण्ड (Pound) आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। विधिक इतिहास के अतिरिक्त अनेक विधान- संहिताएं भी हैं। इनमें मनु की मनुस्मृति, हम्मुराबी की विधान-संहिता और नेपोलियन की विधान-संहिता उल्लेखनीय हैं।

  1. सैन्य इतिहास-

राजनीतिक इतिहास से जुड़ा सैन्य इतिहास (Military History) है। यद्यपि युद्ध एक राजनीतिक क्रियाकलाप माना गया है तथापि सैन्य इतिहास में युद्ध के कारणों का विशद् अध्ययन, रण-नीति, युद्ध की युक्तियाँ, सेना व सैन्य सामग्री का संगठन आदि का अध्ययन किया जाता है। बहुत पहले यूनान में थ्यूसीडायडस (Thucydides) ने पेलोपोनेशियन युद्ध इतिहास (The History of the Peloponnesian War) की रचना की। इसी तरह इंग्लैंड में क्लेरैंडन ने ‘महान् गृह युद्ध’ (The Great Rebellion) की रचना की। आजकल सैन्य इतिहास पर अधिक बल दिया जा रहा है।

  1. बौद्धिक इतिहास-

मौलिक विचारों और सिद्धांतों ने मानव इतिहास को काफी प्रभावित किया है। बौद्धिक इतिहास (Intellectual Hisotry) इसी का अध्ययन करता है। प्रो० बार्ने के शब्दों में, “जिस प्रकार मानव मस्तिष्क मानव व्यक्तित्व और व्यवहार में समन्वय कारक है, उसी प्रकार किसी युग विषय के प्रचलित चिन्तन मानव संस्कृति के विकास में सहायक होते हैं।” बौद्धिक इतिहास की उपयोगिता पर टिप्पणी करते हुए डॉ० सैम्युअल जॉनसन ने कहा है, “बौद्धिक इतिहास की अपेक्षा कोई भी इतिहास उतना उपयोगी नहीं है। यह चिन्तन, विवेक व विज्ञान के विकास का अध्ययन करता है।” पेजहॉट (Pagehot), टार्डे (Tarde), दुर्थीम (Durkheim) आदि इतिहासकारों ने इस तरह के इतिहास की रचना की है। किन्तु, बौद्धिक इतिहास का पहला प्रणेता लिपजीग का कार्ल लैम्परे (Karl Lamprecht) था! प्रो० जेम्स हार्वे रॉबिन्सन (James Harvey Robinson) ने पहली बार वैज्ञानिक विधि पर बौद्धिक इतिहास की रचना की।

  1. विश्व इतिहास—

आजकल विश्व इतिहास भी काफी लोकप्रिय हो गया है। यह राष्ट्रीय या क्षेत्रीय इतिहास से बिल्कुल भिन्न है। इसका दृष्टिकोण भी काफी व्यापक है। यातायात के तीव्र साधनों ने समय और दूरी पर विजय प्राप्त कर ली है। इससे पूरी विश्व एक घरौंदा बन गया है। अतः यह आवश्यक है कि इतिहासकार एक अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनावें। इस सम्बन्ध में प्रो० इल्टन (Elton) का कहना है, “सभी उत्तम ऐतिहासिक कृतियाँ विश्व इतिहास हैं ऐसा इसलिए कि यह इसके अंश अध्ययन करते वक्त संपूर्ण का स्मरण करता है।” सर्वप्रथम एच0 जी0 वेल्स (H. G. Wells) ने इतिहास की रूपरेखा (Outline of History) की रचना कर विश्व इतिहास लिखने की परम्परा शुरू की। इसी तरह अनेक आधुनिक लेखकों यथा सीले (Seeley), हेज (Hayes), बोट्सफोर्ड (Botsford), केलर (Keller), फ्लीक (Flick) आदि ने भी विश्व इतिहास की रचना की है। किन्तु, उन्हें भी कोई विशेष सफलता नहीं मिली। वस्तुतः किसी भी इतिहासकार के लिए विश्व इतिहास की रचना करना अत्यन्त ही दुष्कर कार्य है।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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