उद्यमिता और लघु व्यवसाय / Entrepreneurship And Small Business

साहस पूंजी से आशय | साहस पूँजी के स्रोत एवं विधियाँ | Meaning of Venture Capital in Hindi | Methods and Sources of Venture Financing in Hindi

साहस पूंजी से आशय | साहस पूँजी के स्रोत एवं विधियाँ | Meaning of Venture Capital in Hindi | Methods and Sources of Venture Financing in Hindi

साहस पूंजी से आशय

(Meaning of Venture Capital)

साहस पूँजी कम्पनी भारत में एक नवीन अवधारणा है जो तकनीकी विकास तथा उन्नयन के लिये उच्च जोखिम युक्त उद्यमियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये बनाया गया है। साहस पूँजी दो शब्दों से मिलकर बना है- साहस एवं पूँजी। ‘साहस’ से आशय किसी कार्यवाही से है, जिसका परिणाम अनिश्चित होता है, लेकिन जिसमें हानि के खतरे की जोखिम समाहित रहती है। ‘पूँजी’ से आशय उपक्रम प्रारम्भ करने के लिये संसाधनों से है। इस प्रकार, साहस पूँजी से अभिप्राय उपक्रम के उन संसाधनों (पूँजी) से है, जिनमें जोखिम तथा साहसिकता (Adventure) समाहित है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि “नये व्यावसायिक उपक्रम को प्रारम्भ से कोष उपलब्ध कराने की वित्तीय क्रिया को साहस पूँजी कहा जाता है।”

केन्द्रीय बैंक यू० के ० के जर्नल के अनुसार, “जोखिम पूँजी द्वारा एक विनियोगी उद्यमीय योग्यता को बाजार के अवसर के सदुपयोग हेतु व्यावसायिक कौशल व वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस प्रकार दीर्घकालीन पूँजी लाभ प्राप्त होता है।’

सागरी एवं गुइडाटी के अनुसार, “साहसिक पूँजी का प्रादुर्भाव उच्चस्तरीय आधुनिक तकनीकी आधारित उपक्रमों के वित्तीय संसाधन के रूप में हुआ है।”

साहस पूँजी के स्रोत एवं विधियाँ

(Methods and Sources of Venture Financing)

साहस पूँजी के अनेक स्रोत हैं, जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं-

(1) समृद्ध निजी व्यक्ति

(2) पेंशन फण्ड, प्रन्यास, बीमा कम्पनी, बैंक आदि।

भारत में साहस पूंजी निम्न तीन रूपों में उपलब्ध है-

(1) समता (Equity)- भारत में समस्त साहस पूँजी फण्ड्स द्वारा समता के रूप में सहायता प्रदान की जाती है, किन्तु उनका योगदान सामान्यतः कुल समता पूँजी के 49% से अधिक नहीं होता है। साहस पूँजी फण्ड द्वारा एक उपक्रम के समता अंश इसलिये क्रय किये जाते हैं कि अन्ततः उन्हें बेचकर पूँजी लाभ अर्जित करना है।

(2) शर्तयुक्त ऋण (Conditional Loan)- शर्तयुक्त ऋण रॉयल्टी के रूप में पुनर्भुगतान योग्य होता है, जबकि परियोजना विक्रय का सृजन करने लगती है। ऐसे ऋण पर ब्याज का भुगतान नहीं करना होता है। साहस पूंजी फण्ड द्वारा सामान्यतः 2 से 15% के मध्य रॉयल्टी वसूल की जाती हैं। कुछ फण्ड्स रॉयल्टी की अपेक्षा उच्च ब्याज दर के भुगतान का विकल्प भी साहसी को देते हैं, जबकि परियोजना वाणिज्यिक रूप से पूर्णतः सुदृढ़ हो जाती है।

(3) आय नोट (Income Note)- इसमें परम्परागत ऋण तथा शर्तयुक्त ऋण दोनों की विशेषतायें शामिल हैं, जिसमें उद्यमी को ब्याज के साथ विक्रय पर रॉयल्टी का भी भुगतान करना होता है। कोष असुरक्षित ऋण के रूप में विभिन्न विकास चरणों में 9% ब्याज पर उपलब्ध कराये जाते हैं, साथ ही विक्रय पर रॉयल्टी भी वसूल की जाती है।

आधुनिक समय में भारत में साहस पूँजी प्रदान करने वाली संस्थाओं को निम्नलिखित चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-

(1) निजी क्षेत्र की कम्पनियाँ- इसके अन्तर्गत निम्नलिखित शामिल हैं-

(i) इन्डज वेंचर कैपिटल फण्ड (मफतलाल एवं हिन्दुस्तान लीवर द्वारा प्रवर्तित)

(ii) 20वीं सेंचुरी वेंचर कैपिटल कारपोरेशन लिमिटेड

(iii) वेंचर कैपिटल फण्ड (वी०बी० देसाई द्वारा प्रवर्तित)

(2) बैंकों द्वारा प्रवर्तित कम्पनियाँ- इसके अन्तर्गत निम्नलिखित शामिल हैं-

(i) इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग (सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा प्रवर्तित)

(ii) भारतीय विनियोग फण्ड (ग्रिन्डलेज बैंक द्वारा प्रवर्तित)

(iii) एस०बी० आई० वेंचर कैपिटल फण्ड।

(iv) कैन बैंक वेंचर कैपिटल फण्ड (कैनफिना तथा कैनरा बैंक द्वारा प्रवर्तित कम्पनियाँ)

(3) राज्य वित्त निगमों द्वारा प्रवर्तित कम्पनियाँ- इसमें निम्नलिखित कम्पनियाँ शामिल हैं-

(i) आन्ध्र प्रदेश औद्योगिक विकास निगम वेंचर कैपिटल लिमिटेड

(ii) गुजरात वेंचर फाइनेंस लिमिटेड (गुजरात वित्त निगम द्वारा प्रवर्तित)

(4) अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा प्रवर्तित कम्पनियाँ- इसमें निम्नलिखित कम्पनियाँ शामिल हैं-

(i) भारतीय टेक्नोलॉजी विकास एवं सूचना कम्पनी लिमिटेड (भारतीय औद्योगिक एवं विनियोग निगम तथा यूनेट ट्रस्ट आफ इण्डिया द्वारा प्रवर्तित) ।

(ii) जोखिम पूँजी एवं टेक्नोलॉजी वित्त निगम लिमिटेड (भारतीय औद्योगिक वित्त निगम की सहायक) ।

(iii) भारतीय औद्योगिक विकास बैंक का ‘वेन्चर कैपिटल डिवीजन’

उपरोक्त के अतिरिक्त प्रवर्तकों को नई परियोजनाओं के लिये निम्नलिखित सुविधायें भी उपलब्ध हैं-

(i) लोक निक्षेप (Public Deposit)-पिछले दो दशकों में निगम क्षेत्र में नई परियोजनाओं के वित्त प्रबन्धन के क्षेत्र में लोक निक्षेप का महत्व निरन्तर बढ़ता जा रहा है। सरकार के द्वारा इस सम्बन्ध में समय-समय पर कई दिशा-निर्देश भी जारी किये गये हैं, जिससे कि विनियोक्ताओं के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो तथा प्राप्त धन का प्रवर्तक द्वारा सदुपयोग किया जा सके।

(ii) चरणबद्ध लोक प्रस्ताव (Phased Public Offer)- सरकार ने लाभदायक कम्पनियों के लिये पूँजी बाजार में आने की दृष्टि से चरणबद्ध रूप में अपने अंशों को जनता में निर्गम की व्यवस्था को है। सामान्यतः ऐसी कम्पनी को सूचीयन के लिये अपने 60% अंश जनता में जारी करने पड़ते हैं।

(iii) बाजार में अंशों का स्थापन (Placement of Share in the Market)- लघु उद्यमियों के लिये यह सुविधा उपलब्ध है, जो उच्च निर्गम लागत तथा आधारभूत ढाँचा विकसित न होने के कारण जनता के समक्ष वित्त के लिये नहीं जा सकते हैं। ऐसे उद्यमियों को वित्तीय सहायता के लिये भारत सरकार ने नवीनतम् दिशा-निर्देश जारी किये हैं, जिनमें वित्तीय संस्थायें सुविधायें प्रदान करती हैं।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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