समाज शास्‍त्र / Sociology

आतंकवाद से तात्पर्य | भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ | आतंकवाद के विविध रूप | आतंकवाद का समाधान

आतंकवाद से तात्पर्य | भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ | आतंकवाद के विविध रूप | आतंकवाद का समाधान

आतंकवाद की समस्या

(आतंकवाद एवं विश्वशान्ति)

आतंकवाद : वैश्विक चुनौती

मानव-मन में विद्यमान भय प्रायः उसे निष्क्रिय और पलायनवादी बना देता है। इसी भय का सहारा लेकर समाज का व्यवस्था-विरोधी वर्ग अपने दूषित और निम्नस्तरीय स्वार्थों की सिद्धि के लिए समाज में आतंक फैलाने का प्रयास करता है। स्वार्थसिद्धि के लिए यह वर्ग हिंसात्मक साधनों का प्रयोग करने से भी नहीं चूकता। इसी स्थिति से आतंकवाद का उदय होता है।

आतंकवाद से तात्पर्य-

आतंकवाद एक ऐसी विचारधारा है, जो राजनैतिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शक्ति या अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग में विश्वास रखती है। अस्त्र-शस्त्रों का ऐसा घृणित प्रयोग प्रायः विरोधी वर्ग, दल, समुदाय या सम्प्रदाय को भयभीत करने और उस पर विजय प्राप्त करने की दृष्टि से किया जाता है। अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए, आतंकवादी गैरकानूनी ढंग से अथवा हिंसा के माध्यम से सरकार को गिराने तथा शासनतन्त्र पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास भी करते हैं। इस प्रकार ‘आतंकवाद’ उस प्रवृत्ति को कह सकते हैं. जिसमें कुछ लोग अपनी उचित अथवा अनुचित माँग मनवाने के लिए घोर हिंसात्मक और अमानवीय साधनों का प्रयोग करने लगते हैं।’

विश्व में व्याप्त हिंसा की प्रवृत्तियाँ और आतंकवाद-

आज लगभग परा विश्व आतंकवाद की चपेट में है। राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए सार्वजनिक हिंसा और हत्याओं का रास्ता अपनाया जा रहा है। संसार के भौतिक दृष्टि से सम्पन्न देशों में आतंकवाद की यह प्रवृत्ति और भी ज्यादा पनप रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी और भारतीय प्रधानमन्त्रियों श्रीमती इन्दिरा गांधी तथा श्री राजीवगांधी की नृशंस हत्या, अमेरिका के हवाई जहाज में बम विस्फोट, भारत के हवाई जहाज का पाकिस्तान में अपहरण आदि घटनाएँ अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद के कुछ उल्लेखनीय उदाहरण हैं।

भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ-

विगत दो दशाब्दियों में भारत के पंजाब, बिहार, असम, बंगाल, जम्मू-कश्मीर आदि कई प्रान्तों में आतंकवादियों ने व्यापक स्तर पर आतंकवाद फैलाया । 10 मार्च, 1975 ई० को भारत के भूतपूर्व न्यायाधीश श्री ए० एन० राय की हत्या का प्रयास किया गया।

बिहार के पूर्व रेलवे मन्त्री श्री ललितनारायण मिश्र, पं0 दीनदयाल उपाध्याय, श्रीमती इन्दिरा गांधी, श्री राजीव गांधी, श्री लोंगोवाल, भूतपूर्व सेनाध्यक्ष श्री अरुण श्रीधर वैद्य, ‘पंजाब केसरी’ के सम्पादक लाला जगतनारायण, कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मुशीर-उल-हक आदि देश के अनेक गणमान्य व्यक्तियों को आतंकवादियो ने मौत के घाट उतार दिया। पंजाब और कश्मीर में पाकिस्तान-प्रशिक्षित आतंकवादियों द्वारा कई वर्षों से निदोष लोगों की हत्याओं का सिलसिला जारी है और आज भी वे ऐसा करने से नहीं चूक रहे हैं।

10 अगस्त, 1986 ई० को आतंकवादियों द्वारा इण्डियन एयरलाइन्स का एक हवाई जहाज गिरा दिया गया, जिसके फलस्वरूप 329 यात्रियों की तत्काल मृत्यु हो गई। सन् 1995 ई० में जम्मू में आतंकवादियों द्वारा गणतन्त्र दिवस समारोह के अवसर पर किया गया विस्फोट, तिनसुकिया मेल में बम विस्फोट, चरारे-शरीफ दरगाह अग्निकाण्ड; 7 मार्च, 1997 ई० को फिल्म निर्माता- निर्देशक मुकेश दुग्गल की हत्या; 22 मार्च, 1997 ई० को 7 कश्मीरी पण्डितों की हत्या; 29 मार्च, 1997 ई० को जम्मू में भीषण बम विस्फोट में 25 लोगों की मृत्यु, 7 मई, 1997 ई० को त्रिपुरा में 16 जवानों की हत्या; 12 अगस्त, 1997 ई० को टी-सीरिज के मालिक गुलशन कुमार की हत्या; 19 नवम्बर, 1997 ई० को हैदराबाद में एक कार बम विस्फोट में टी0 वी0 कैमरा दल के 6 सदस्यों एवं एक पत्रकारसहित 23 लोगों की हत्या, 2 दिसम्बर, 1997 ई० को रणवीर सेना के हमलावरों द्वारा बिहार में 65 व्यक्तियों की हत्या, 14 फरवरी, 1998 ई० को.कोयम्बटूर में भाजपा अध्यक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी की हत्या का प्रयास; 20 जून, 1999 ई० को अनन्तनाग में 15 हिन्दू मजदूरों की हत्या, 28 जून 1999 ई0 को पुंछ में 17 लोगों की हत्या; 24 दिसम्बर, 1999 ई० को इण्डियन एयरलाइन्स के विमान का अपहरणः 20 फरवरी, 2000 ई० को बारूदी सुरंग फटने से जगदलपुर में 23 पुलिसकर्मियों का शहीद होना; 28 फरवरी, 2000 ई0 को जम्मू में 5 हिन्दुओं की निर्मम हत्या; 3 मार्च, 2000 ई० को जम्मू से आ रही बस में विस्फोट होने से 9 यात्रियों की दर्दनाक मौत; 20 मार्च, 2000 ई० की रात्रि को अनन्तनाग जिले में सिक्खों की आबादी वाली वस्ती बिट्टासिंहपुरा में 35 सिक्खों की सामहिक हत्या. 13 दिसम्बर, 2001 को भारतीय संसद पर हमला, गुजरात में एक बड़ी आतंकवादी कार्यवाही में दो आतंकियों ने 24 सितम्बर, 2002 ई० को गांधीनगर के अक्षरधाम मन्दिर में घुसकर अन्धाधुन्ध गोलीबारी करके निर्दोष श्रद्धालुओं को निशाना बनाया। जम्मू-कश्मीर में मुफ्ती मुहम्मद सईद की सरकार के गठन के साथ जम्मू के ऐतिहासिक रघुनाथ मन्दिर’ व उसके निकटवर्ती शिव मन्दिर’ पर उग्रवादियों ने हमला किया। 21 नवम्बर, 2002 ई0 को इन मन्दिरों पर हथगोलों से सुनियोजित हमले किए गए थे। भआतंकवाद की एक और उल्लेखनीय घटना 26 नवम्बर, 2008 को मुम्बई में घटी। आतंकवादियों ने ताज होटल में नारीमन बिल्डिंग पर हमला कर दिया। इस हमले में 185 लोग मारे गए नारीमन बिल्डिग को बम से उड़ा दिया गया। 9 आतंकवादी भी मारे गए, एक जिन्दा पकड़ा गया। घटना में पाकिस्तान का हाथ होना पाया गया। ये घटनाएँ इस तथ्य का स्पष्ट संकेत देती हैं कि भारत में आतंकवाद का घृणित सिलसिला निरन्तर बढ़ता ही जा रहा है।

आतंकवाद के विविध रूप-

आतंकवादी घटनाएँ केवल भारत में ही नहीं, वरन् विश्वभर में हो रही है। 19 अप्रैल, 1995 ई० को अमेरिका के ओक लाहाम नगर मे एक भयानक बम विस्फोट हुआ, जिसके परिणामस्वरूप एक बहुखण्डीय भवन ध्वस्त हो गया ओर सौ से अधिक व्यक्ति मारे गए। 11 सितम्बर, 2001 को आतंकी हमले में दुस्साहसिक रूप से न्यूयॉर्क में विश्व व्यापार केन्द्र के दो टावरों को धराशायी कर दिया गया था। इस स्थल को अब ‘ग्राउण्ड जीरो’ का नाम दिया गया है। इस हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे।

जापान के भूमिगत योकोहामा रेलवे स्टेशन पर जहरीली गैस से 1995 ई0 में 12 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। जापान में ही एक अन्य स्थान पर इसी प्रकार की जहरीली गैस से सौ से अधिक व्यक्ति बीमार पड़ … के राष्ट्रपति हुस्नीमुबारक पर 26 जून, 1995 ई0 को सशस्त्र आतंकवादियों ने आक्रमण किया, किन्तु व बाल-बाल बच गए।

भारत में आतंकवादी गतिविधियों हेतु सहायता देनेवाला पाकिस्तान भी स्वयं को आतंकवाद की अग्नि से नहीं बचा पाया है। वहाँ 19 नवम्बर, 1995 ई0 को मिस्र दूतावास में हुए बम विस्फोट से 17 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई। पाकिस्तान की मुजाहिर कौमी मूवमेण्ट ने कराची में अपनी आतंकवादी गतिविधियों से हिंसा एवं आतंक का वातावरण उत्पन्न कर रखा है. जिससे निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित करके इसके विरुद्ध कार्यवाही प्रारम्भ कर दी है।

इस प्रकार आतंकवाद किसी राष्ट्र-विशेष या क्षेत्र-विशेष की समस्या नहीं है। यह एक प्रवृत्ति है, जो आज सम्पूर्ण मानव-समाज में फैल रही है। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति का समूल नाश नहीं किया गया तो पृथ्वी का कोई भी क्षेत्र मानव-जीवन को सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ रहेगा।

आतंकवाद का समाधान-

आतंकवाद का स्वरूप या उद्देश्य कोई भी हो, इसका भौगोलिक क्षेत्र कितना ही सीमित या विस्तृत क्यों न हो, किन्तु यह तो स्पष्ट ही है कि इसने हमारे जीवन को अनिश्चित और असुरक्षित बना रहता है। आतंकवाद मानव-जाति के लिए कलंक है, इसलिए इसका कठोरता से दमन किया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने आतंकवादी गतिविधियों को बड़ी गम्भीरता से लिया है और इनकी समाप्ति के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारत की संसद ने आतंकवाद-विरोधी विधेयक पारित कर दिया है, जिसके अन्तर्गत आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहनेवाले व्यक्तियों को कठोर-से-कठोर दण्ड देने की व्यवस्था की गई है।

आतंकवाद की समस्या का समाधान मानसिक और सैनिक दोनों ही स्तरों पर किया जाना चाहिए। जिन लोगों को पीडा हई अथवा जिनके परिवार अथवा सम्पत्ति को नुकसान हुआ है तथा जिनके सम्बन्धियों और रिश्तेदारों की मृत्यु हुई है। उन्हें भरपूर मानसिक समर्थन दिया जाना चाहिए जिससे उनके घाव हरे न रहें और वे मानसिक पीडा के बोझ को सह न सकने की स्थिति में स्वयं भी आतंकवादी न बन जाएं।

आतंकवाद और अलगाववाद की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक है कि सरकार के प्रति जनता में विश्वास जगाया जाए। इसके अतिरिक्त जहाँ एक ओर आतंकवादियों के साथ कठोर व्यवहार करना होगा, वहीं गुमराह युवकों को राष्ट्र की मुख्यधारा की कोशिश भी करनी होगी। आतंकवादियों को पकड़ने तथा उन्हें दण्डित करने के लिए आधुनिक साधनों तथा तकनीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए जनता को शिक्षित करने की भी आवश्यकता है, जिससे जनता आतंकवादियों से लड़ने में भय का अनुभव न करे।

आतंकवाद से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए जाने चाहिए। अनेक देशों के राजनेताओं ने आतंकवाद की भर्त्सना की है। आवश्यकता इस बात की है कि सभी देश एकमत से आतंकवाद को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लें। विश्व की सभी सरकारों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के विरुद्ध पारस्परिक सहयोग करना चाहिए, जिससे कोई भी आतंकवादी गुट किसी दूसरे देश में शरण या प्रशिक्षण न पा सके।

उपसंहार-

यह कैसी विडम्बना है कि बुद्ध, गुरु नानक और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों की जन्मभूमि पिछले कुछ दशकों से सबसे अधिक अशान्त और हिंसात्मक हो गई है। अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि देश के करोड़ों नागरिकों ने हिंसा की सत्ता को स्वीकारते हुए उसे अपने दैनिक जीवन का अंग मान लिया है। भारत के विभिन्न भागों में हो रही आतंकवादी गतिविधियों ने देश की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है। आतंकवाद का समूल नाश ही इस समस्या का समाधान है।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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