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भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति | Nature of Indian economy in hindi

भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति | Nature of Indian economy in hindi

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भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति- भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति को समझने के लिए, इसकी विशेषताओं को परम्परागत व नवीनता के सन्दर्भ में देखा जा सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की परम्परागत विशेषतायें निम्न हैं-

(1) भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था है।

(2) भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की प्रधानता होने पर भी अन्य देशों की तुलना में कृषि अभी भी काफी पिछड़ी हुई स्थिति में है। अशिक्षा तथा साधनों की कमी के कारण केवल 15 प्रतिशत भूमि पर ही आधुनिक ढंग से खेती की जा रही है।

(3) भारतीय अर्थव्यवस्था पर जनसंख्या का अत्यधिक दबाव है। क्योंकि यहाँ की जनसंख्या की वृद्धि काफी ऊँची है।

(4) जनसंख्या की दृष्टि से भारत का चीन के बाद विश्व में दूसरा स्थान है लेकिन यदि जनसंख्या वृद्धि की यही दर बनी रहे तो अगले 10 सालों में भारत में जनसंख्या का अधिक दबाव होगा।

(5) कृषि की मौसमी प्रकृति के कारण पूर्ण बेरोजगारी के अतिरिक्त अर्द्ध बेरोजगारी भी पाई जाती है।

(6) भारत में खनिज,वनसम्पदा, जनशक्ति एवं अन्य साधन पर्याप्त मात्रा में पाये जाने पर भी प्रति व्यक्ति आय कम है जिससे लोगों का जीवन स्तर निम्न है।

(7) आर्थिक विषमता, पूँजी की कमी व परिवहन व संचार की सुविधाओं का अभाव।

नवीन विशेषतायें

(1) पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक उपक्रमों, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना पर बल दिया जा रहा है जिससे कृषि क्षेत्र में क्रान्ति आई है।

(2) ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विकास।।

(3) सार्वजनिक उपक्रमों की संख्या में निरन्तर वृद्धि से तथा आर्थिक नीति के अन्तर्गत सरकार द्वारा विनिवेश की नीति अपनाये जाने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विस्तार में कमी आना।

(4) प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि                   

(5) बचत एवं पूँजी निर्माण दरों में वृद्धि ।

(6) औद्योगिक विकास में वृद्धि

(7) विनियोजित ढंग से औद्योगिक विकास की प्रक्रिया द्वारा नये उद्योगों की स्थापना। इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत स्थैतिक विकास की स्थिति से निकलकर प्रावैगिक स्थिति में प्रवेश कर चुका है तथा निम्न अर्थव्यवस्था से ऊपर उठकर मिश्रित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है। अतः भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था है।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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