मानव संसाधन प्रबंधन / Human Resource Management

मानव संसाधन प्रबन्ध की विशेषतायें | सेविवर्गीय प्रबन्ध की विशेषतायें | मानव संसाधन प्रबन्ध के उद्देश्य | सेविवर्गीय प्रबन्ध के उद्देश्य | ‘सेविवर्गीय प्रबन्धन’ और “मानव संसाधन प्रबन्धन” में अन्तर

मानव संसाधन प्रबन्ध की विशेषतायें | सेविवर्गीय प्रबन्ध की विशेषतायें | मानव संसाधन प्रबन्ध के उद्देश्य | सेविवर्गीय प्रबन्ध के उद्देश्य | ‘सेविवर्गीय प्रबन्धन’ और “मानव संसाधन प्रबन्धन” में अन्तर | Features of Human Resource Management in Hindi | Features of Departmental Management in Hindi | Objectives of Human Resource Management in Hindi | Objectives of Departmental Management in Hindi | Difference between ‘Service Management Management’ and “Human Resource Management” in Hindi

मानव संसाधन प्रबन्ध या सेविवर्गीय प्रबन्ध की विशेषतायें

Characteristics of HRM or Personnel Management

(1) सामान्य प्रबन्ध का ही एक विशिष्ट अंग है- सेविवर्गीय प्रबन्ध सामान्य प्रवन्ध का ही एक विशिष्ट अंग है, अतः सेविवर्गीय प्रबन्ध में सामान्य प्रबन्ध की सभी विशेषतायें पायी जाती हैं।

(2) मानव-शक्ति संसाधनों का विकास- सेविवर्गीय प्रबन्ध के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से उपक्रम में मानव शक्ति संसाधनों का प्रबन्ध किया जाता है, फलस्वरूप उपक्रम में लगे कर्मचारियों का आर्थिक एवं मानसिक विकास संभव होता है।

(3) कर्मचारियों के सम्बन्ध की व्याख्या- सेविवर्गीय प्रवन्ध कर्मचारियों के सम्बन्धों की व्याख्या करता है।

(4) श्रम के साथ मानवता के व्यवहार को महत्व- सेविवर्गीय प्रबन्ध इस तथ्य पर जोर देता है कि श्रम एक सजीव वस्तु है, अतः उसके मानवता का व्यवहार किया जाना चाहिये।

(5) एक विधि- सेविवर्गीय प्रबन्ध एक विधि, एक दृष्टिकोण, एक चिन्तन तकनीक एवं प्रबन्ध दर्शन है।

(6) श्रमिकों का विकास करने से सम्बन्धित प्रयास- सेविवर्गीय प्रबन्ध के द्वारा कर्मचारियों अथवा श्रमिकों का विकास करने से सम्बन्धित प्रयास प्रयास किये जाते हैं।

(7) श्रमशक्ति का समुचित उपयोग- सेविवर्गीय प्रबन्ध के द्वारा मानव शक्ति या श्रम शक्ति का समुचित उपयोग किया जाता है।

(8) कर्मचारियों का व्यक्तिगत एवं सामूहिक विकास- कर्मचारी प्रशासन कर्मचारियों के व्यक्तिगत एवं सामूहिक विकास पर बल देता है।

मानव संसाधन प्रबन्ध/सेविवर्गीय प्रबन्ध के उद्देश्य

(Objects of HRM or Personnel Management)

गोयल एवं मेयर्स ने सेविवर्गीय प्रबन्ध के निम्नलिखित उद्देश्य बतलाये हैं-

(1) अधिकतम वैयक्तित विकास- सेविवर्गीय प्रबन्ध का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य व्यक्तियों का अधिकतम विकास करना है। इसके लिए प्रबन्ध को प्रत्येक कार्य करने से पूर्व इस बात पर विचार कर लेना चाहिये कि कर्मचारियों पर उस कार्य का क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि किसी कार्य का कर्मचारियों के व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो ऐसे कार्यों से बचने के प्रयास करने चाहिये। सेविवर्गीय प्रबन्ध को कर्मचारियों के समक्ष आदर्श उपस्थित करना चाहिये तथा ऐसे मानवीय मूल्यों की स्थापना करनी चाहिये जिनका कि दीर्घकालीन एवं सामाजिक महत्व हो ।

(2) अच्छी कार्य-दशाओं का विकास करना- सेविवर्गीय प्रबन्ध का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि वह अच्छी कार्य दशाओं का विकास करे। अच्छी कार्य दशायें तभी प्राप्त की जा सकती हैं जबकि नियोक्ता को मानवीय मूल्यों का आभास कराया जाये तथा श्रमिक वर्ग भी इस तथ्य को भली-भाँति महसूस कर ले कि संगठन की भलाई के लिये प्रबन्धक वर्ग के साथ सहयोग करने में ही उनकी भलाई है।

(3) मानवीय संसाधनों के उपयोग पर बल देना- सेविवर्गीय प्रबन्ध का एक उद्देश्य मानवीय साधनों के अधिकतम उपयोग पर बल देना है, इससे दोहरा लाभ प्राप्त होगा-एक ओर तो भौतिक साधनों के उपयोग से बचत होने से कम पूँजी की आवश्यकता होगी तथा दूसरी ओर मानवीय साधनों का अधिक उपयोग होने से देश में व्याप्त भीषण बेरोजगारी की समस्या का आंशिक समाधान होगा।

(4) अन्य उद्देश्य-

(A) भारतीय सेविवर्गीय प्रबन्ध संस्था ने सेविवर्गीय प्रबन्ध के निम्नलिखित उद्देश्य बतलाये हैं-

(1) कर्मचारियों को इस योग्य बनाना कि वह संगठन के कार्यों में अधिकतम सहयोग प्रदान कर सके।

(2) मानवीय व्यक्तित्व के प्रति सम्मान व्यक्त करना एवं मानव कल्याण में वृद्धि करना।

(3) अच्छे मानवीय सम्बन्धों का निर्माण करना एवं बनाये रखना।

(B) प्रो. सी. वी. मेमोरिया ने सेविवर्गीय प्रबन्ध के मुख्य उद्देश्यों को इस प्रकार बतलाया है-

(1) कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करना।

(2) कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करके उनके मनोबल में वृद्धि करना।

(3) नियोक्ता कर्मचारी वर्ग के मध्य मधुर औद्योगिक सम्बन्धों की स्थापना करना।

(4) उपलब्ध मानव शक्ति का अधिकतम उपयोग करना।

‘सेविवर्गीय प्रबन्धन’ और “मानव संसाधन प्रबन्धन” में अन्तर

(Difference between Personnel Management and Human Resource Management)

क्रम सं. (SI. No)

अन्तर का आधार (Basis of Difference)

सेविवर्गीय प्रबन्धन (Personnel Management)

मानव संसाधन प्रबन्धन या विकास (Human Resource Management)

1.

बल देना (Giving Emphasize)

सेविवर्गीय प्रबन्धन की अवधारणा नियमों व प्रक्रियाओं की स्पष्टता पर बल देती है। नियम प्रबन्ध के कार्यों को नियंत्रिण करते हैं। कार्मिको व प्रबन्ध के बीच सम्बन्ध रोजगार संविदा व सामूहिक सौदेबाजी से नियंत्रित होते हैं।

मानव संसाधन प्रबन्ध खुले सिरे वाले संविदे हैं जिसकी शर्तें व्यवसाय से सम्बद्ध होती हैं तथा विवाद को नकारात्कम अन्तर्वैयक्तिक सम्बन्धों का परिणाम माना जाता है।

2. 

कार्य की प्रकृति (Nature of Function)

इसमें कार्यों की प्रकृति मुख्य रूप से प्रतिक्रियात्मक होती है।

मानव संसाधन प्रबन्ध में कार्यों की प्रकृति अग्रसक्रिय होती है। यह संगठन की विद्यमान आवश्यकताओं व भावी आवश्यकताओं के पूर्वानुमान से सम्बन्ध रखता है।

3.

निर्माण (Building)

सेविवर्गीय प्रवन्ध कर्मचारियों एवं प्रबन्ध के मध्य सामूहिक ठहराव के आधार पर बनता है।

मानव संसाधन प्रबन्ध में सामूहिक सम्बन्धों के वैयक्तिकी से सम्बन्धित होता है।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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