अर्थशास्त्र / Economics

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 | National Population Policy 2000 in Hindi

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 | National Population Policy 2000 in Hindi

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (2000)

(National Population Policy)

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने 15 फरवरी, 2000 को राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (2000) की घोषणा की जिसका उद्देश्य दो-बच्चों के मानक (Norm) को प्रोत्साहित करना था ताकि सन् 2046 तक जनसंख्या को स्थिर किया जा सके। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

प्रथम, सरकार ने यह निर्णय किया है कि संविधान के 42वें संशोधन के अनुसार 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों पर लगाए प्रतिबन्ध को जो सन् 2001 तक मान्य था, बढ़ाकर सन् 2026 तक कर दिया जाए। यह इसलिए किया जा रहा है कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों जिन्होंने छोटे परिवार के मानक का प्रभावी रूप में अनुसरण किया है, को दण्डित न किया जाए और उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों को लोकसभा में अधिक सीटें देकर पुरस्कृत न किया जाए। अतः लोकसभा की सीटों को सन् 2026 तक जड़ीकृत करने का उद्देश्य जनसंख्या नीति की उपेक्षा करने वाले राज्यों को पुरस्कार न देना है और जो राज्य छोटे परिवार के मानक (Small family norm) का सफलतापूर्वक पालन करते रहे हैं, उन्हें दण्ड न देना है।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय जनसंख्या नीति में सन् 2046 तक स्थिर जनसंख्या का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित उपायों का उल्लेख किया गया है:

  1. प्रति 100 जीवित जन्मे बच्चों के लिए शिशु मृत्युदर को 30 से कम करना,
  2. मातृ मृत्युदर (Maternal Mortality Rate) को 1,00,000 जीवित जन्मों के लिए 100 से भी कम करना,
  3. सर्वव्यापक प्रतिरक्षण (Universal Immunization)
  4. 80 प्रतिशत प्रसवों (Deliveries) के लिए प्रशिक्षित स्टॉफ के साथ नियमित डिस्पेन्सरियों, हस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों का प्रयोग करना,
  5. एड्स (AIDS) के बारे में सूचना उपलब्ध कराना, संक्रामिक रोगों का प्रतिबंधन और नियंत्रण करना,
  6. दो बच्चों के छोटे परिवार के मानक को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देना,
  7. सुरक्षित गर्भपात की सुविधाओं को बढ़ाना,
  8. शिशु विवाह प्रतिबन्ध कानून और जन्म-पूर्व लिंग-निर्धारण तकनीक कानून (Pre- Natal Diagnostic Techniques Act) का कड़ाई से पालन करना,
  9. लड़कियों की विवाह आयु को 18 वर्ष के ऊपर उठाना और बेहतर तो यह है कि इसे 20 वर्ष से भी अधिक करना,
  10. ऐसी स्त्रियों को जो 21 वर्ष की आयु के पश्चात् विवाह करें और दूसरे बच्चे के जन्म के पश्चात् गर्भधारण समाप्ति करने के उपाय को स्वीकार कर लें, विशेष पुरस्कार देना,
  11. चिकित्सा की भारतीय पद्धति का, प्रजनन (Re-production) और बाल स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था के लिए समन्वय करना,
  12. गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले ऐसे व्यक्तियों को जो दो बच्चों के पश्चात् बन्ध्याकरण या नसबन्दी (Sterilization) करवा लेते हैं, स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना,
  13. जनसंख्या नीति के कार्यान्वयन पर निगरानी रखने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में जनसंख्या पर एक राष्ट्रीय आयोग (National Commission on Population) नियुक्त करना। इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण की समस्याओं के बारे में अधिक ध्यान केन्द्रित करना है। चूंकि भारत 100 करोड़ जनसंख्या के निशाने को पहले ही पहुंच चुका है, इसलिए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति सन् 2010 तक परिवार नियोजन उपायों को तेज कर इसे 110 करोड़ तक सीमित करना चाहती है।

अगले 10 वर्षों के लिए इसके लिए जो कार्य-योजना तैयार की गयी है, उसमें निम्नलिखित बातें शामिल की गयी हैं-

(क) ग्राम-पंचायत स्तर पर स्वयं-सहायता समूहों (Sub-help groups) जिनमें अधिकतर गृहणियां शामिल हैं, स्वास्थ्य देखभाल करने वाले कामगारों और ग्राम-पंचायतों के साथ विचार- विमर्श करना।

(ख) प्राथमिक शिक्षा को निःशुल्क और अनिवार्य बनाना होगा।

(ग) जन्म और मृत्यु के साथ विवाहों और गर्भ के पंजीकरण (Registration) को अनिवार्य बनाना होगा।

सरकार यह आशा करती है कि सन् 2046 तक जनसंख्या स्थिरीकरण (Population stabilisation) के उद्देश्य को प्राप्त कर सकेगी। अभी फौरी रूप में आधार-संरचना (Infrastructure) को उन्नत करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है ताकि गर्भ-निरोध की अभी तक न पूरी की गयी जरूरतों की ओर ध्यान दिया जा सके।

मोटेल तौर पर जनसंख्या नीति को सही दिशा में उठाया कदम माना गया है। माईकल ब्लैसौफ़, यू०एन०एफ०पी०ए० (UNFPA) के प्रतिनिधि ने उल्लेख किया है : “यह नीति सरकार की जनसंख्या सम्बन्धी चिन्ताओं का स्पष्ट प्रमाण है।” इस नीति में जबरी उपायों का प्रयोग न करके “सकारात्मक उपायों” पर अधिक निर्भरता रखी गयी है।

किन्तु आलोचकों का आरोप है कि नयी जनसंख्या नीति परिवार-परिसीमन का सारा भार “स्त्रियों’ पर डाल रही है। भारतीय परिवार नियोजन संस्था (Family Planning Association of India) की अध्यक्ष डॉ नीना पुरी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा : “यह नीति पुरुष-सहयोग पर “नरम” है। नयी नीति का सन्देश यह है कि जनसंख्या नियंत्रण का भार स्त्रियां सहेंगी और पुरुष बड़ी आसानी से इसके द्वारा मुक्त कर दिए गए हैं।” नीति में केवल स्त्रियों के लिए गर्भधारण की समाप्ति के उपायों (Terminal methods) को स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहनों की व्यवस्था है। यह कहीं बेहतर होता यदि नीति में दो बच्चों के बाद नसबन्दी (Sterilisation) कराने के लिए पुरुषों को भी इस प्रकार के प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाते। इस तर्क में काफी बल है और सरकार को प्रोत्साहनों के बारे में संशोधन करना चाहिए ताकि परिवार के दोनों साझीदारों-पुरुष एवं स्त्री पर जनसंख्या नियंत्रण का भार समान रूप से डाला जा सके।

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Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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