शिक्षाशास्त्र / Education

शैक्षिक नियोजन क्या है? | नियोजन के तत्व | शैक्षिक नियोजन में प्रमुख विशेषतायें

शैक्षिक नियोजन क्या है? | नियोजन के तत्व | शैक्षिक नियोजन में प्रमुख विशेषतायें

शैक्षिक नियोजन का तात्पर्य  (शैक्षिक नियोजन क्या है?)

नियोाजन से अर्थ किसी कार्य योजना का प्रारूप तथा उस पर किये गये अमल से है सही योजना किसी भी कार्य को योजनाबद्ध तथा सही ढंग से करने की प्रक्रिया है। शैक्षिक क्षेत्र में योजना निर्माण एक प्रभावपूर्ण प्रक्रिया है जिससे सही परिणाम निकलने की आशा की जाती है। इस सन्दर्भ में बेस्तर शब्दकोष के अनुसार नियोजन एक योजना बनाने तथा उसको क्रियान्वित करने की प्रक्रिया को कहते हैं। इस परिभाषा में योजना को एक पूर्व निर्धारित व्यूह रचना, तथा निश्चित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया क्रियात्मक कार्यक्रम है। योजना सदैव कुछ निश्चित उद्देश्यों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई जाती है। शिक्षा के क्षेत्र में नियोजन वे सभी प्रयास होते हैं जो विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति के लिए तथा शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन लाने के लिए योजनाबद्ध तथा उद्देश्यपूर्ण विधि से किये जाते हैं। इस दृष्टि से नियोजन उस कार्य संरूप प्रक्रिया को कहते हैं। जो राष्ट्रीय योजनाओं के आधार पर सभी साधनों तथा लक्ष्यों को एकत्र करके मनोवांछित परिवर्तन लाने के उद्देश्य से अग्रिम रूप से ही बनायी जाती है। विकासशील राष्ट्रों में अनेक समस्याओं के कारण जैसे संसाधनों की कमी, सहायता देने वाले अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों में अनुचित दबाव के कारण इन देशों में नियोजन पूर्ण रूप से नहीं हो पाया है।

नियोजन के सिद्धान्तों में जैसे-जैसे विकास तथा उन्नति हुई है वैसे ही इसकी व्यावहारिकता में भी परिवर्तन हुआ है। शैक्षिक नियोजन के स्वरूप को निम्न रूप से अधिक स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं।

(1) शैक्षिक नियोजन का उद्देश्य भविष्य में होने वाली किसी आवश्यकता अथवा किसी स्थिति की व्याख्या करना व उसका निर्धारण करना है। इस प्रकार के नियोजन से भविष्य में होने वाली किसी आकस्मिक घटना का आभास किया जा सकता है। जिससे उसे हल करने में अधिक समस्या न हों। इससे तात्पर्य है कि शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तत्व जैसे- विद्यार्थियों की संख्या उनके प्रकार तथा उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उनको दी जाने वाली सुविधाओं के विस्तार का आभास करना तथा यथासंम्भव उनका पूर्वानुमान लगाना।

(2) अनिश्चित भविष्य की व्याख्या करना ही नियोजन का एक मात्र उद्देश्य नहीं है अपितु शैक्षिक नियोजन का अर्थ है भविष्य से जुड़े आँकड़ों की व्याख्या करना तथा उन्हें सक्रियात्मक योग्यताओं में बदलना ताकि उन परिस्थितियों के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके जो भविष्य में घट सकती हैं।

(3) शैक्षिक नियोजन से त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता मिलती है।

(4) शैक्षिक नियोजन अपने आप में भविष्य में आने वाली जटिलताओं का समाधान उनमें समन्वय तथा नियंत्रण करने की प्रक्रिया है। नियोजन की आवश्यकता आमतौर पर बड़ी व जटिल परियोजनाओं में होती है। इस प्रकार की परियोजनाओं में अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक पूर्व निश्चित नीति की आवश्यकता होती हैं।

इस दृष्टि से शैक्षिक नियोजन में प्रमुख विशेषतायें अग्र प्रकार की होती है।

  1. लक्ष्य अभिविन्यास,
  2. भविष्य अभिविन्यास,
  3. कार्यक्षमता व कार्यकुशलता में वृद्धि,
  4. कार्यक्षमता साधनों से उद्देश्यों की पूर्ति।

इस प्रकार साधारण भाषा में नियोजन उपलब्ध साधनों का किसी निश्चित उद्देश्य के लिए अधिकतम सद्उपयोाग करना है। इसमें प्रमुख तत्त निम्न होते हैं-

  1. उद्देश्यों को निर्धारित करना ।
  2. उद्देश्यों के क्रम का निर्धारण।
  3. उद्देश्यों की प्राप्ति की प्रक्रिया के लिए अनुमानित, भौतिक तथा मानवीय साधन।
  4. साधनों की मात्रा तथा सीमा।
  5. उद्देश्य प्राप्ति की समय सीमा।

शैक्षिक नियोजन के प्रमुख तत्व निम्न प्रकार होते हैं-

  1. शैक्षिक नियोजन समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप होता है।
  2. शैक्षिक नियोजन से प्राप्त होने वाले लाभ प्रत्यक्ष नहीं होते अपितु भविष्य में प्राप्त होते हैं।
  3. शैक्षिक नियोजन की प्रक्रिया मात्र शैक्षिक प्रसार तक ही सीमित नहीं होती अपितु उसमें शिक्षित वर्ग का उत्पादक व्यवसायों में सही ढंग से प्रयोग करने का प्रावधान भी होता है।
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Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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