अर्थशास्त्र / Economics

सेवा क्षेत्र का अर्थ | सेवा क्षेत्र का योगदान या महत्व | प्रमुख सेवा क्षेत्र की क्रियाओं का विस्तार

सेवा क्षेत्र का अर्थ | सेवा क्षेत्र का योगदान या महत्व | प्रमुख सेवा क्षेत्र की क्रियाओं का विस्तार

सेवा क्षेत्र का अर्थ (Meaning of Service Sector)

सेवा क्षेत्र में उत्पादन न होकर उससे सम्बन्धित परामर्श एवं तकनीकी दृष्टि सम्मिलित होती है जो उत्पादन से अधिक उसकी गुणवत्ता में वृद्धि करती है। इतना ही नहीं, सेवा क्षेत्र में जैसे- शिक्षा से मानव पूँजी का निर्माण होता है, जिसके अभाव में मानव पूँजी की उपादेयता ही समाप्त हो जायेगी, अंथात् राष्ट्र विभ्रम की स्थिति में पहुँच जायेगा, क्योंकि किसी राष्ट्र की महत्वपूर्ण पूँजी मानव पूँजी है। इस प्रकार सेवा क्षेत्र उत्पादकता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है।

सेवा क्षेत्र की प्रकृति एवं क्षेत्र

सेवा क्षेत्र की प्रकृत्ति पर ध्यान दें तो कह सकते हैं सेवाएँ मानव जीवन में अति उपयोगी होती तो हैं ही, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण इसकी प्रकृति एवं क्षेत्र की पहचान है जो मानवपयोगी अनेक ऐसे तथ्यों की जानकारी प्रदान कर देती है कि अभाव में अनिष्ट भी हो सकता है, जैसे डॉक्टर द्वारा स्वस्थ जीवन कैसे जिएं, इसके लिए दी गई सलाह देखने में छोटी लगती है, लेकिन उसका पालन न करने पर वह जानलेवा भी हो सकती है, जैसे- एड्स से बचाव कैसे करें, स्वस्थ कैसे रहें आदि सलाह मानव जीवन के लिए सर्वाधिक उपयोगी हैं।

सेवा क्षेत्र में सदैव अन्तिम वस्तुओं की जगह सेवाओं का जन्म होता है, क्योंकि अन्तिम रूप से तैयार वस्तुओं को कैसे विक्रय किया जाये, यह सेवा क्षेत्र की परिधि में आता है। ध्यान रहे, जैसे-जैसे आर्थिक विकास की बढ़ोत्तरी हो रही है, वैसे-वैसे सेवा क्षेत्र का विस्तार हो रहा है।

भारतवर्ष में सेवा क्षेत्र का योगदान या महत्व

भारतीय परिदृश्य में जब सेवा क्षेत्र की संरचना का विश्लेषण करें तो स्वतः अनुभव होने लगता है, क्योंकि देश में उत्पादन क्षेत्र (Production Sector ) का उतनी तेजी से विस्तार नहीं हो रहा है, जितनी तेजी से सेवा क्षेत्र की विकरालता दिखायी दे रही है। वर्तमान में सेवा क्षेत्र इतना विस्तृत रूप धारण कर रहा है कि अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग बन चका है।

संक्षप में सेवा क्षेत्र की संरचना का अध्ययन करे तो देश में सेवा क्षेत्र का स्वरूप 2/ 3 प्रतिशत तक पहुँच रहा है। इसका विवरण निम्न प्रकार है-

  1. शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी, चिकित्सा, धार्मिक, समाज सुधार सेवाएँ। 2. सुरक्षा सेवा। 3. घरेलू सेवा, टेलरिंग, नाई, ब्यूटी पार्लर, गृह निर्माण, लाण्ड्री सेवाएं। 4. सामान्य प्रशासन सेवा – पुलिस, न्याय सेवा। 5, मनोरंजन सेवा – दूरदर्शन, रेडियो, समाचार प्रकाशन सेवा। 6. व्यापार सेवा। 7. रलवे सेवा। 8. पारिवहन सेवा – सड़क परिवहन, वायुयान सेवा, जलयान सेवा। 9. संचार सेवा। 10 भण्डारण सवा। 11. बैकिंग सेवा। 12. बीमा सेवा। 13. व्यावसायिक सेवायें । 14. होटल, रेस्टोरिन्ट सेवा। 15. अन्य सेवाएँ- लाइजनिंग।

भारत में सेवा क्षेत्र का निरन्तर विस्तार हो रहा है। क्योंकि 21 वीं शताब्दी सेवा क्षेत्र के नाम से ही पहचान बना चुकी है। आज उत्पादन की तुलना में सेवा क्षेत्र में भारी पूँजी निवेश हो रहा है, जैसे देश में बैंकिंग सेवा, बीमा क्षेत्र निरन्तर विकास के मार्ग को प्रशस्त करते हुए पोषित व पल्लवित हो रहा है। इतना ही नहीं, वर्तमान में परिष्कृत सेवाओं का बौर चल रहा है। सरकारी क्षेत्र में व्यापारिक भवनों का निर्माण व आवास निर्माण में बड़े पेमाने पर विनियोग हो रहा है। परिवहन सेवायें व संचार सुविधायें निरन्तर उच्चतम बिन्दुओं को पार कर रही हैं, क्योंकि भारत में मोबाइल सेवा में क्रान्ति हुई है। यह इसका प्रमाण है। सार्वजनिक क्षेत्र में सेवा क्षेत्र की प्रगति उच्चतम बिन्दु पर है। इतना ही नहीं होटल, रेस्टोरेन्ट तथा खुदरा व्यापार के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के ऑकडे गवाह हैं कि सेवा क्षेत्र का विकास इए्टतम बिन्दु तक पहुँचने के लिए प्रयत्नशील है।

यदि प्राथमिक क्षेत्र से सेवा क्षेत्र की तुलना करें तो कह सकते हैं कि 195। ई() में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 56.7% था जबकि सेवा क्षेत्र मात्र 29.6 प्रतिशत योगदान दे रहा है, परिणामस्वरूप 2009 -2010 ई0 में प्राथमिक क्षेत्र सिकुड़कर मात्र 16.93 प्रतिशत रह गया है, वहीं सेवा क्षेत्र का योगदान 57.30 प्रतिशत तक पहुँच चुका है।

प्रमुख सेवा क्षेत्र की क्रियाओं का विस्तार

भारतवर्ष में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ 4 प्रतिशत के स्थान पर 6 प्रतिशत तक पहुँच चुकी हैं, यह भविष्य में और परिष्कृत हो जायेंगी, ऐसा अनुमान है क्योंकि उपरोक्त सेवाओं का राष्ट्रीय आय में योगदान बढ़ रहा है।

जैसे-जैसे भारतीय जनजीवन शहरीकृत हो रहा है, क्योंकि ग्रामीण जनसंख्या की शहरी क्षेत्रों में प्रवासी प्रवृत्ति बढ़ रही है, आज ग्रामीण जनसंख्या 68 प्रतिशत जबकि शहरी जनसंख्या 32 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। परिणामस्वरूप शहरी जनसंख्या की रुचि पर्यटन, धार्मिक स्थानों के भ्रमण में बढ़ने के कारण होटल, रेस्टोरेन्ट व्यवसाय में अभूतपूर्व दृष्टि के आंकड़े प्राप्त हो रहे है क्योंकि इस क्षेत्र का योगदान स्वतन्त्रता पूर्व शून्य था जो 1980 के दशक तक मात्र 0.7 प्रतिशत था वह बढ़कर 2009-10 तक 1.6 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है।

यदि औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्र के योगदान पर ध्यान दें तो इस क्षेत्र से व्यापारिक सेवाएँ अनवरत बढ़ रही हैं जो बढ़कर 2009-10 ई0 सकल घरेलू उत्पाद में व्यापारिक सेवाएँ 15.2 प्रतिशत तक योगदा दे रही हैं जो 1980 के दशक तक मात्र 11 प्रतिशत थी। भविष्य में यह क्षेत्र निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होगा, क्योंकि कृषि क्षेत्र में सेवा क्षेत्र विस्तार के लिये नये आयाम जोड़ रहा हे। वहीं औद्योगिक क्षेत्र के उत्पादन से सम्बन्धित सेवाएँ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष स्थान प्राप्त कर रही हैं।

इसी प्रकार देश में परिवहन, संचार एवं भण्डारण सेवा में निरन्तर प्रगति हो रही है। मात्र रेलवे सेवा में कमी के संकत मिले हैं, क्योंकि इस सेवा का योगदान जो 1.5 प्रतिशत था।वह घटकर 2009-10 तक मात्र 1 प्रतिशत रह गया है। लेकिन अन्य परिवहन जैसे- सड़क, वायु परिवहन सेवाओं ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है। उक्त परिवहन सेवा का योगदान 2009-10 ई0 तक बढ़कर 5.7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है जो पहले मात्र 3 प्रतिशत था। जबकि संचार क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रान्ति ने सबको पीछे छोड़ दिया है।

अन्त में, सेवा क्षेत्र की वास्तविकता वैश्विक जगत में, अभूतपूर्व सफलता की इबारत लिख रही है, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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