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खो-खो खेल के नियम (Kho-Kho)- इतिहास, खेल का मैदान, अंपायर एवं रैफरी, टाइम कीपर एवं स्कोरर, परिणाम

खो-खो खेल के नियम (Kho-Kho)- इतिहास, खेल का मैदान, अंपायर एवं रैफरी, टाइम कीपर एवं स्कोरर, परिणाम

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इतिहास

 खो-खो एक भारतीय खेल है। इस खेल का प्रारम्भ पूना में हुआ था। सन् 1960 में ‘खो-खा फेडरेशन ऑफ इण्डिया’ की स्थापना की गई सन् 1960 में प्रथम राष्ट्रीय चैम्पियनशिप (पुरुष) का आयोजन किया गया सन् 1961 में महिलाओं की खो-खो चैम्पियनशिप प्रारम्भ की गई । सन् 1982 के ‘एशियन खेल’ में खो-खो का प्रदर्शन मैच खेला गया लेकिन ‘एशियन खेल’ मैं खो-खो को अभी तक सम्मिलित नहीं किया गया है।

खेल का मैदान

 खो-खो खेलने के लिए एक आयताकार मैदान की आवश्यकता होती है जो 27 मीटर लम्बा और 15 मौटर चौड़ा होता है। दोनों छोरों पर एक-एक अन्त बना होता है जो 16 मीटर लम्बा और 2.70  मीटर चौड़ा होता है। मैदान के दोनों छोरों पर एक-एक पोल लगा होता है जो भूमि से 120 सेमी ऊँचे होते हैं। मैदान के मध्य में बीचों-बीच एक गली बनाई जाती है, जो 30 सेमी चौड़ी होती है इस गली में आठ बराबर-बराबर इलाके बनाए जाते हैं, जो वर्गाकार होते हैं। इनकी लम्बाई और चौड़ाई 12 इंच x 12 इंच होती है।

खेल

 खो-खो का खेल दो टीमों के मध्य खेला जाता है । प्रत्येक टीम में 9 खिलाड़ी होते हैं तथा 3 खिलाड़ी सबस्टीट्यूट होते हैं। प्रत्येक मेच चार पारियों में खेला जाता है। प्रत्येक पारी सात मिनट की होती है। प्रत्येक टीम दो पारियों में बैठती है और दो पारियों में भागती है। बैठने वाले टीम के खिलाड़ी ‘मेजर’ कहलाते हैं और भागने बाले खिलाड़ी रनर कहलाते हैं। प्रारम्भ में तीन खिलाड़ी सीमा के अन्दर होते हैं। इन तीनों के आऊट होने पर दूसरे तीन खिलाड़ी अन्दर आते हैं तथा खेलते हैं।

बैठे हुए खिलाड़ियों में से नौवां खिलाड़ी, रनर्स को पकड़ने के लिए खड़ा होता है तथा खेल का प्रारम्भ करता है। वह नियमानुसार भागते हुए खिलाड़ियों को पकड़ने का प्रयास करता है और बैठे हुए खिलाड़ियों में से किसी को भी ‘खो’ देता है। तत्पश्चात् ‘खो’ मिलने वाला खिलाड़ी रनर्स को उठकर पकड़ता है और उसका स्थान पहले वाला खिलाड़ी ले लेता है। प्रत्येक मेजर पक्ष को एक रनर को आऊट करने पर एक अंक दिया जाता है। सभी रनरों के समय से पहले आऊट होने पर उनके विरुद्ध एक ‘लोना’ दिया जाता है। पारी समाप्त होने तक खेल इसी प्रकार से खेला जाता है। अंत में अधिक अंक प्राप्त करने वाली टीम को विजयी घोषित कर दिया जाता है।

खो-खो खेल के नियम

खो-खो खेल के नियम
source- sanskritimagazine.com

खो-खो के नियम

 खो-खो खेल के प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं-

(1) बैठने अथवा दौड़ने के लिए टॉस द्वारा निर्णय लिया जाता है।

(2) खेल के मैदान में सभी चिह्न आवश्यक रेखाओं द्वारा साफ तथा स्पष्ट अंकित किए जाने चाहिए।

(3) बैठने वाली टीम के सभी सदस्य नियमानुसार बैठते हैं अर्थात् खिलाड़ी नं० एक, तीन, पाँच, सात का मुँह एक तरफ तथा खिलाड़ी ने० दो, चार, छः, आठ का मुँह दूसरी तरफ होता है।

(4) बैठने बाली टीम के सदस्य इस प्रकार बैठते हैं कि रनरों को किसी प्रकार की रुकावट न हो।

(5) भागता हुआ धावक, बेठे हुए खिलाड़ी के पास जाकर पीछे से ऊँची आवाज में उसे ‘खो’ देता है। कोई भी बैठा हुआ खिलाड़ी बिना खो लिए उठकर भाग नहीं सकता है।

(6) ‘खो’ मिलने के बाद बह खिलाड़ी उठकर भागता है तथा उसके स्थान पर ‘खो देने वाला खिलाड़ी बैठ जाता है।

(7) ‘खो’ लेने के पश्चात् यदि उठने पर खिलाड़ी ‘सेंटर लाईन’ को क्रास करता है तो फाउल माना जाता है।

(8) ‘खो’ लेकर भागने वाला खिलाड़ी ठठते ही अपनी दिशा का चुनाव करता है और उसी दिशा में भागता है।

(9) भागने वाला खिलाड़ी केन्द्र गली से दूसरी दिशा में तब तक नहीं जा सकता जब तक कि वह पोल के चारों तरफ घूम नहीं लेता ।

(10) खेल के दौरान भागने वाला खिलाड़ी सीमा से बाहर जा सकता है लेकिन नियमानुसार।

(11) कोई भी रनर बैठे हुए खिलाड़ी को छू नहीं सकता।

(12) रनर के दोनों पाँव यदि सीमा से बाहर चले जायें तो वह आउट माना जाता है।

(13) दिशा यहण करने के बाद सक्रिय खिलाड़ी पुन: ‘क्रास लाईन’ पर धावा बोल सकता है तथा इसे फाउल नहीं माना जाता।

अंपायर एवं रैफरी 

 खो-खो के खेल में प्राच: दो अम्पायर होते हैं जो लाबी के बाहर अपने स्थान पर खडे रहते हैं तथा मैच का संचालन करते हैं। वे केन्द्रीय गली द्वारा विभाजित अपने स्थान से भी खेल की देखरेख करते हैं। दो अम्मायरों के अतिरिक्त खेल में एक रेफरी होता है जो अम्पायरों की सहायता करता है तथा किसी भी प्रकार से खेल में होने वाले नियमों का उल्लंघन होने पर खिलाड़ियों को दण्ड देता है। पारी के अन्त में वह दोनों टीमों के स्कोर एवं विजयी टीम की घोषणा करता है।

टाइम कीपर एवं स्कोरर

 खेल में एक टाइम कीपर होता है जो समस्त खेल के समय का रिकार्ड रखता है तथा सीटी बजाकर खेल का आरम्भ और समाप्ति का संकेत देता है। प्रत्येक पारी के अंकों का हिसाब-किताब स्कोरर रखता है और यह भी ध्यान रखता है कि प्रत्येक खिलाड़ी अपने निश्चित क्रम पर आ रहा है अथवा नहीं। परिणाम से पूर्व वह स्कोर शीट तैयार करता है और फाइनल बना कर रैफरी को दे देता है।

परिणाम

 मेच के अन्त में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली टीम विजयी कहलाती है। दोनों टीमों के समान अंक होने की दशा में एक और पारी खेली जाती है जो एक मेजर और एक रनर के लिए होती है। फिर भी अंक बराबर हो तो टाईब्रेकर का सहारा लिया जाता है।

खो-खो के लिए खेले जाने वाले प्रमुख टूर्नामन्ट

राष्ट्रीय पुरुष चैम्पियनशिप

राष्ट्रीय महिला चैम्पियनशिप

राष्ट्रीय जूनियर चैम्पियनशिप

इंटर स्टेट स्कूल चैम्पियनशिप

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About the author

Kumud Singh

M.A., B.Ed.

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